What is Imagination and Types of it by McDougall’s?

What is imagination? | What is Imagination and Types of it by McDougall’s? | कल्पना किसे कहते हैं। कल्पना के प्रकार | मैक्डूगल के अनुसार कल्पना क्या है ? Imagination by McDougall’s

इस आर्टिकल मे हम मेग्डुगल के द्वारा कल्पना के प्रकार व परिभाषा के बारे मे पढ़ेंगे l (What is imagination by McDougall’s)

कल्पना का अर्थ :-

कल्पना का सम्बन्ध अतीत के अनुभव से होता है तथा इसमें नवीनता का तत्व पाया जाता है। कल्पना मे नवीनता पायी जाती है। कल्पना गत अनुभवों से सम्बन्धित होती है। यानी कल्पना बीते हुए अनुभव पार आधारित होती है। कल्पना में सदैव नवीनता का तत्व पाया जाता है। कल्पना में पुराने अनुभवों के नीव पर विचारों के नई इमारत खड़ी की जाती है। यह नई इमारत देश और काल से परे होती है।

जब मनुष्य के सामने कोई उद्दीपक उपस्थित नहीं होता है। तब मनुष्य उस वस्तु के प्रति जो विचार अपने मन में उत्पन्न करते हैं उसे कल्पना कहा जाता है।

कल्पना किसे कहते है ? वस्तु का प्रत्यक्षीकरण मानव मस्तिष्क में प्रतिमाओं को स्थापित करता है वह इन प्रतिमाओं में परिवर्तित परिवर्तन करके नवीनता उत्पन्न कर देता है इसी नवीनता को कल्पना कहते हैं

कल्पना की परिभाषा :-

मैक्डूगल के अनुसार :– “कल्पना दूरस्थ वस्तुओ के सम्बन्ध का चिंतन होता है ”।

रायबर्न के अनुसार– ”कल्पना वह शक्ति है जिसके द्वारा हम अपनी प्रतिभाओं का नये आकार से प्रयोग करते हैं। वह हमको अपने पूर्ण अनुभव को किसी ऐसी वस्तु का निर्माण करने में सहायता देती है, जो पहले कभी नहीं थी”।

साधारण शब्दों में हम कह सकते हैं कि कल्पना एक मानसिक प्रक्रिया है, यह स्वतः ही चलती रहती है।

कल्पना को परिभाषित करते हुए कहा जा सकता है कि कल्पना पूर्व प्रत्यक्षीकृत अनुभवों पर आधारित वह प्रक्रिया है जो रचनात्मक होती है, परन्तु आवश्यक नहीं है कि वह सृजनात्मक भी हो।

मैक्डूगल ने कल्पना को निम्नलिखित प्रकारों मे विभाजित किया है:-

  1. सृजनात्मक कल्पना
  2. अदनात्मक कल्पना
  3. कार्यसाधक कल्पना
  4. रसात्मक कल्पना

(1) सृजनात्मक कल्पना :- इस तरह की कल्पना का सीधा सम्बन्ध सृजन से होता है। अथार्त कुछ नया इसी कल्पना के आधार पर कवि कविता की रचना करता है, लेखक कहानी की रचना करता है, चित्रकार चित्र की रचना करता है।

(2) अदनात्मक कल्पना :- जब बालक दूसरे की कल्पना तथा दूसरे के विचार की आधार पर अपनी कल्पना करता है। इस कल्पना को अदानात्मक कल्पना कहते है।

(3) कार्यसाधक कल्पना :– ज्ञान का विकास इसी कल्पना के आधार पर विकास होता है। जटिल मानसिक प्रक्रियाओं को निष्पादन कार्यसाधक कल्पना के आधार पर किया जाता है। जटिल समस्याओं का समाधान इसी कल्पना के आधार पर होता हैै।

कार्यसाधक कल्पना दो प्रकार की होती है

  1. सैद्धांतिक कल्पना
  2. व्यावहारिक कल्पना

(3.1) सैद्धांतिक कल्पना :- उच्च कोटि के नियम, सिद्धांत इसी कल्पना के आधार पर प्रतिपादित किया जाता है।

(3.2) व्यावहारिक कल्पना :- व्यवहारिक तथा क्रियात्मक बातो से सम्बंधित कल्पनाए व्यवहारिक कल्पना कहलाती है। दैनिक जीवन मे उपयोग होने वाली वस्तुओ से सम्बंधित कल्पना का बालको के लिए बहुत ही उपयोगी होता है।

(4) रसात्मक कल्पना :- रसात्मक कल्पना को सौंदर्यात्मक कल्पना के नाम से भी जाना जाता है। रसात्मक कल्पना के दो प्रकार है।

  1. मनोराजमायी कल्पना
  2. कलात्मक कल्पना

(4.1) कलात्मक कल्पना :- एक लेखक अपनी कहानी की रचना इसी कल्पना के आधार पर करता है। नाटक, कविता, कहानी इसी कल्पना के आधार पर लिखी जाती है।

(4.2) मनोराजमायी कल्पना : -इस प्रकार के कल्पना मे एक लेखक वास्तविकता को भूल कर अपनी कल्पना के तरंगो मे गोते लगता है।

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