गणित की प्रकृति (Nature of Mathematics) For CTET

गणित की प्रकृति (Nature of Mathematics) For CTET यह आर्टिकल CTET और विभिन्न राज्यों की शिक्षक पात्रता परीक्षा को ध्यान मे रख कर लिखा गया है l Nature of Mathematics या गणित की प्रकृति .

गणित की प्रकृति की बात की जाए तो हम सब आसानी से बता सकते हैं कि गणित की प्रकृति तर्कसंगत वैज्ञानिक होती है । गणित का सीधा संबंध नापतोल से होता है । गणित के सिद्धांतों के ज्ञान के बिना हम किसी भी क्षेत्र की नाप तोल नहीं कर सकते।

परिभाषा

बेर्टलैंड रसल “, यधपि गणित तर्कशास्त्र की एक शाखा नहीं है फिर भी यह तर्कपूर्ण भाषा है और इसलिए इसे सर्वमान्य बना दिया कि इनके तथ्य, तर्क पर आधारित है ।

गणित किस प्रकार कार्य करता है?

प्रत्येक गणित की शाखा स्वयं सिद्धियों से प्रारंभ होती है । स्वयं सिद्धियों के लिए किसी भी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है । स्वयं सिद्धियां विभिन वस्तुओं के बीच काल्पनिक संबंध स्थापित करती है । जैसे A+B = B+A इसका अर्थ है कि संख्याओं के क्रम बदलने पर योग की क्रिया में कोई परिवर्तन नहीं होता है । इसे commutative property कहते है । गणित के सिद्धांत तर्कपूर्ण व्यवस्थित होते हैं । तथा यह सर्वमान्य होते हैं । इसके ज्ञान का आधार हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ होती है l तथा गणित विषय के ज्ञान पर विश्वास किया जा सकता है l

गणित का ज्ञान विश्व में सभी स्थानों पर समान होता है । इसका सत्यापन किसी भी समय तथा किसी भी स्थान पर किया जा सकता है। गणित की समस्याओं के उत्तर सदैव स्थिर रहते हैं । उनमें परिवर्तन नहीं किया जा सकता। तरीका अलग हो सकता है , परंतु परिणाम सदैव समान रहता है । गणित के परिणाम विवाद रहित रहते हैं गणित के परिणाम विवाद रहित रहते है ।
अन्य विषयों में भिन्न भिन्न व्यक्तियों के विचार भिन्न भिन्न हो सकता है । जिससे परिणाम में विभिनता आ जाती है । परंतु गणित में ऐसा नहीं होता गणित की प्रकृति का विचार सर्वमान्य होता है ।

गणित के ज्ञान से व्यक्ति में स्वयं के बारे में अनुभूति होती है ।
गणित के ज्ञान का प्रयोग विज्ञान में अधिक होता है। बिना गणित के विज्ञान उन्नति नहीं कर सकता, क्योंकि गणित विषय की प्रकृति में शुद्ध मापन निहित हो जाता है।
गणित विषय अपने आप में इतना विस्तृत हो गया है कि इसकी कुछ शाखाएं अब अलग से स्वतंत्र विषय के रूप में गिनी जाने लगी है, जैसे सांख्यिकी ।
गणित अपने आप में पूर्ण वैध (validate ) व विश्वसनीय (Reliable ) होता है । इसकी वैधता तथा विश्वसनीयता पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता है । बालकों की यह सोच विकसित करने का अवसर देता है तथा अनुभव प्रदान करता है ।

गणित की प्रकृति की विशेषताएं निम्नलिखित है :-

  1. गणित विषय में अमृत विषय की व्याख्या की जाती है :- व्याख्या के आधार पर इनमें विचार मजबूत होते हैं । तथा उन्हें स्थूल रूप में परिवर्तित किया जा सकता है । जैसे ठोस का आयतन ज्ञात करने के लिए जो सूत्र प्रयोग किया जाता है । वह मूर्त होते हैं , परंतु सूत्रों का प्रयोग करने पर जब व्यवहारिक दृष्टि से ठोसो के आयतन की गणना करते हैं तो स्थूल रूप में बदल जाते हैं ।

2. गणितीय भाषा : गणित की अपनी भाषा होती है जिसका प्रयोग गणितीय संक्रिया को हल करने में किया जाता है , जैसे आयतन, घन त्रिभुज इत्यादि।

3. गणित में सामान्य अनुमान का क्षेत्र व्यापक होता है । इसमें आगमन तथा निगमन समाहित होता है । वास्तव में बीजगणित अंकगणित का ही सम्मान अनुमान होता है।

4. गणित में निश्चितता होती है। प्रत्येक ज्ञान गणित द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है। इसके उत्तर निश्चित होते हैं । उनमें किसी प्रकार का शक अथवा संदेह नहीं किया जा सकता।

5. गणित विषय के ज्ञान का आधार हमारी ज्ञानेंद्रियां होती हैं । जिन पर विश्वास किया जा सकता है । क्योंकि इस ज्ञान का एक निश्चित आधार होता है।

6. अन्य विषयों के साथ अंतर्संबंध गणित के ज्ञान का प्रयोग अन्य विषयों में आसानी से किया जा सकता है। भौतिक विज्ञान, रासायनिक विज्ञान , भूगर्भ विज्ञान और सांख्यिकी आदि गणित के अंग माने जाते हैं ।
यहां तक कि अन्य विषयों जैसे ज्योग्राफी कॉमर्स, यह सभी गणितीय विज्ञान का सहारा लेते हैं।गणित की प्रकृति (Nature of Mathematics) For CTET

7. हिंदी विषय में भी गणित का ज्ञान प्रयोग होता है , जैसे चौपाई तथा छंदों की मात्रा गिनने में।

8. गणित का ज्ञान सर्व व्याप्त होता है । गणित का ज्ञान स्पष्ट, तार्किक तथा क्रमबद्ध रूप से होता है । उसे एक बार में समझने में आसानी होती तथा भुलाया नहीं जा सकता ।

9. गणित के माध्यम से निष्कर्ष निकाले जाते हैं वह सभी सो प्रतिशत सत्य होते हैं । उनके आधार पर भविष्यवाणी की जा सकती है। मौसम संबंधी आंकड़े आदि इसी आधार पर तैयार की जाते हैं। गणित की प्रकृति (Nature of Mathematics) For CTET

हम इस आधार पर कह सकते हैं कि गणित का हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण रोल है। गणित की प्रकृति तर्कसंगत व वैज्ञानिक होती है । जिसका प्रयोग एक आम व्यक्ति दैनिक जीवन में करता है।