गांधी – इरविन समझौता क्या है? What is Gandhi Irwin pact 1931

गांधी इरविन समझौता क्या है?What is Gandhi Irwin pact 1931?

प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, परंतु सरकार ( अंग्रेज ) इस बात का अनुभव कर रही थी कि कांग्रेस से कोई समझौता किया जाए l कांग्रेस कार्यसमिति ने महात्मा गांधी को वायसराय लॉर्ड इरविन के साथ समझौते संबंधी बातचीत करने के लिए अधिकृत किया l गांधी इरविन समझौता क्या है?What is Gandhi Irwin pact 1931?

लॉर्ड इरविन ने 26 जनवरी 1931 को महात्मा गांधी को बिना शर्त जेल से रिहा कर समझौते के अनुकूल वातावरण निर्मित करने का प्रयास किया तथा तेज बहादुर सप्रू तथा एम आर जयकर की मध्यक्षता से महात्मा गांधी व लॉर्ड इरविन के बीच 17 फरवरी 1931 से वार्ता प्रारंभ हुई जिसकी परिणति 5 मार्च 1931 को गांधी इरविन समझौते के रूप में हुई l

इस समझौते को दिल्ली समझौता यह दिल्ली पैक्ट के नाम से भी जाना जाता है समझौते के प्रपत्र पर कांग्रेस की तरफ से महात्मा गांधी ने तथा सरकार की तरफ से लॉर्ड इरविन ने हस्ताक्षर किए थे l

इस समझौते के अनुसार गांधीजी ने निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति व्यक्त की थी :- (What is Gandhi Irwin pact 1931


(1) सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित कर दिया जाएगा l
(2) कांग्रेस द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में शामिल होगी l
(3) पुलिस द्वारा किए गए अत्याचारों की जांच की मांग छोड़ दी जाएगी l

सरकार की ओर से वायसराय निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमत हुए :-

(1) सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा कर दिया जाएगा
(2) समुद्र के किनारे एक निश्चित दूरी तक बसे निवासियों को बिना नमक कर दिए समुद्र से (3) नमक इकट्ठा करने अथवन बनाने का अधिकार दिया जाएगा
(4) आंदोलन के समय जब की गई भूमि व संपत्ति वापस कर दी जाएगी l
(5) शराब जो विदेशी कपड़ों की दुकानों पर शांतिपूर्ण धरना दिया जाए अनुमति होगी l
(6) त्यागपत्र दे चुके सरकारी कर्मचारियों के साथ नरमी का बर्ताव किया जाएगा l

के एम मुंशी ने गांधी इरविन समझौते को भारत के संवैधानिक इतिहास में एक युग प्रवर्तक घटना की संज्ञा दी थी l कांग्रेसी नेताओं के एक बड़े वर्ग ने गांधी इरविन समझौते का स्वागत किया जबकि कांग्रेस के वामपंथी वर्ग एवं देश के ज्यादातर युवाओं ने समझौते की आलोचना की l (What is Gandhi Irwin pact 1931)

युवाओं का आरोप था कि समझौते के तहत भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु की रिहाई का कोई उल्लेख नहीं किया गया जबकि कांग्रेसियों बाद पंथी वर्ग का आरोप था कि महात्मा गांधी ने पूर्ण स्वतंत्रता के लक्ष्य को ध्यान में रखें बिना इस समझौता पर हस्ताक्षर कर दिया था l

लॉर्ड इरविन के जीवनी के लेखक एलेन कैम्पबल जॉनसन ने गांधी इरविन समझौते में महात्मा गांधी के लाभों को सांत्वना पुरस्कार और लॉर्ड इरविन के द्वारा बातचीत के लिए सहमत होने को ‘ एकमात्र आत्मसमर्पण ‘ कहकर संबोधित किया था l