दुर्गाबाई देशमुख समिति ,1958

महिला शिक्षा पर राष्ट्रीय समिति दुर्गाबाई देशमुख समिति 1958

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात महिलाओं तथा लड़कियों जो कि लगभग भारत की आधी जनसंख्या के समान थी, कि समस्या एक प्राथमिकता बनी, परंतु उस समय भी लड़कियों के शिक्षकों प्राय: निम्न प्राथमिकता दी जाती रही।

दुर्गाबाई देशमुख समिति ,1958 कब और कैसे गठित किया गया ।

जुलाई 1957 में योजना आयोग के शिक्षक संबंधित चयन पैनल ने सिफारिश की थी । प्रारंभिक माध्यमिक, माध्यमिक तथा प्रौढ़ स्तरों पर लड़कियों की शिक्षा की प्रकृति से संबंधित प्रश्न के विभिन्न पक्षों की जांच करने और यह मालूम करने की कि क्या वर्तमान शिक्षा प्रणाली उन्हें एक खुश तथा अर्थ पूर्ण जीवन व्यतीत करने मे सहायक है अथवा नहीं और एक उपयुक्त समिति का गठन किया जाए।

सन 1957 में आयोजित राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में यह सुझाव आया कि महिलाओं की शिक्षा से जुड़े संपूर्ण प्रश्न की जांच करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाए । इस समिति का नामकरण दुर्गाबाई देशमुख समिति रखा गया।

इसके पश्चात भारत सरकार ने मई 1958 में महिलाओं की शिक्षा पर एक राष्ट्रीय समिति गठन किया । जिसकी अध्यक्षा श्रीमती दुर्गाबाई देशमुख को बनाया गया।

इस समिति ने अपनी रिपोर्ट जो कि सन 1958 में प्रकाशित हुई अनुशंसा की कि लड़के और लड़कियों की शिक्षा में समानता लाने को उच्चतम प्राथमिकता दी जानी चाहिए ।

केंद्र और राज्य द्वारा इस समस्या का सामना करने के लिए एक साहसिक और मजबूती निश्चित प्रयास करना चाहिए।

दुर्गाबाई देशमुख समिति ने मिडिल स्कूल स्तर पर सहशिक्षा की सिफारिश की, परंतुहाई स्कूल पर लड़कियों के लिए ऐसे अलग विद्यालय स्थापित करने की संस्तुति की जहां पर लड़कियों के लिए उपयुक्त तथा वंहा उनके लिए अधिक विविध पाठ्यचर्या का प्रावधान हो सके।

दुर्गाबाई देशमुख समिति ने यह भी इच्छा व्यक्त की कि माताओं शिशु सदन महिला अध्यापकों के प्रशिक्षण तथा पूर्ण महिलाओं के लिए रोजगारी सुविधाओं या का उपयुक्त प्रावधान किया जाना चाहिए ।

इसके फलस्वरूप नीति में तथा व्यवहार में बहुत सारे प्रावधान किए गए ताकि विशेषकर प्राथमिक स्तर पर लड़कियों की शिक्षा पर महिलाओं को स्थान मिल सके।

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