पूना पैक्ट ( Puna – Pact )

पूना पैक्ट

पूना समझौता ( पूना पैक्ट ) important for kvs,DSSSB

संप्रदायिक पंचाट की घोषणा के समय महात्मा गांधी पुणे के यरवदा जेल में थे उन्होंने इसे भारतीय एकता पर सीधा हमला कहते हुए इसका कड़ा विरोध किया l उनका कहना था कि घोषणा में दलित वर्ग की सामाजिक दशा सुधारने के संदर्भ में कुछ भी नहीं कहा गया है l गांधी जी ने मांग की कि दलित वर्ग के प्रतिनिधियों का चुनाव व्यस्क मताधिकार के आधार पर आम निर्वाचन मंडल के माध्यम से होना चाहिए l ( पूना पैक्ट )

महात्मा गांधी ने दलित वर्ग के लिए काफी संख्या में सीटें सुरक्षित करने की मांग का विरोध नहीं किया था अपनी मांगों को मनवाने के लिए महात्मा गांधी 20 सितंबर 1932 से आमरण अनशन पर बैठ गए थे 20 सितंबर का दिन उपवास व प्रार्थना दिवस के रूप में पूरे देश में मनाया गया जिसके तहत पूरे देश में मंदिर तथा कुआं दलितों के लिए खोल दिए गए थे l ( पूना पैक्ट )

महात्मा गांधी के अनशन पर जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि इस तरह के सुरक्षित व पवित्र कार्य को वृद्ध महिलाओं के लिए छोड़ देना चाहिए जबकि रविंद्र नाथ टैगोर ने महात्मा गांधी को एक संदेश भेज कर कहां भारत की एकता हुआ उसकी सामाजिक अखंडता के लिए उत्कृष्ट बलिदान है l हमारी व्यक्ति आपकी इस महान तपस्या का आदर और प्रेम के साथ अनुकरण करेंगे
मदन मोहन मालवीय डॉ राजेंद्र प्रसाद श्री राजगोपालचारी पुरुषोत्तम दास तथा डॉक्टर अंबेडकर के प्रयासों से 26 सितंबर 1932 को महात्मा गांधी व डॉ आंबेडकर के मध्य एक समझौता हुआ जिसे पूना समझौता के नाम से जाना जाता है l ( पूना पैक्ट )

इस समझौते के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित है l
दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल व्यवस्था समाप्त कर दी गई
प्रांतीय विधान मंडलों में दलितों के लिए सुरक्षित सीटों की संख्या 71 से बढ़ाकर 147 कर दी गई l
केंद्रीय विधानमंडल में दलितों के लिए सुरक्षित सीटों की संख्या में 18% की वृद्धि कर दी गई l