संसाधन तथा इसके प्रकार? What is Resource?

संसाधन तथा इसके प्रकार? What is Resource? इम्पोर्टेन्ट टॉपिक for KVS, DSSSB, UPTET

जिन वस्तुओं का हम अपने दैनिक जीवन में उपयोग करते हुए सभी संसाधन कहलाती है l जैसे कुर्सी, मेज, बस, कार, पेन तथा पेंसिल इत्यादि l ( संसाधन तथा इसके प्रकार?)

हमारे आसपास वे सभी वस्तु तथा पदार्थ जिसकी उपयोगिता हो संसाधन कहलाती है l आसान भाषा में संसाधन होते नहीं बल्कि प्रकृति में उपहार स्वरूप उपलब्ध विभिन्न वस्तुओं को मनुष्य अपने ज्ञान और तकनीक के प्रयोग से उसे अपने लिए उपयोगी बनाता है l जैसे धरती पर कोयला लाखों वर्षों से उपलब्ध था किंतु कोयला तब तब संसाधन कहा जाने लगा जब मनुष्य ने उससे आग उत्पन्न करने की क्षमता खोज ली कुछ संसाधन का आर्थिक मूल्य होता है l जबकि कुछ संसाधनों का आर्थिक मूल्य नहीं होता जैसे धातुओं, रसायनों, वस्तु आदि का आर्थिक मूल्य होता जबकि पर्वतीय भाग्य मरुस्थलीय क्षेत्र के सुंदर दृश्य केवल मनोरंजन करते हैं इनका आर्थिक मूल्य नहीं होता किंतु यह सभी संसाधन है l

संसाधनों के प्रकार :- (संसाधन तथा इसके प्रकार?)

सामान्यता संसाधनों को प्राकृतिक मानव निर्मित और मानव संसाधन के रूप में वर्गीकृत किया जाता है

(1) प्राकृतिक संसाधन :-

  1. जल
  2. सूर्य का प्रकाश
  3. खनिज पदार्थ
  4. वन
  5. मृदा आदि

(2) मानव निर्मित संसाधन :-

  1. घर
  2. सड़क व पुल
  3. विद्यालय
  4. अस्पताल
  5. मशीनें
  6. बाग
  7. कारखाने इत्यादि

(3) मानव संसाधन :- इस प्रकार के संसाधन में मानव व पशु आ जाते हैं

1. प्राकृतिक संसाधन क्या होते हैं?

ऐसे संसाधन जो प्रकृति से मानव को उपहार स्वरूप मिलते हैं उन्हें मनुष्य बिना किसी संशोधन के उपयोग करता है वह प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं l इन्हें पर्यावरण से सरलता से प्राप्त किया जा सकता है l

(1.1) नवीकरणीय संसाधन ( रिन्यूएबल रिसोर्स) :-

ऐसे संसाधन जो प्रकृति में असीमित मात्रा में उपलब्ध होते हैं जिनको प्राकृतिक प्रक्रिया द्वारा या मानव द्वारा बनाया जा सकता है ऐसे संसाधन नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं सूर्य प्रकाश पवन वायु आदि कभी ना समाप्त होने वाली संसाधने आता इन्हें अक्षयशील संसाधन यानी inexhaustible resources भी कहते हैं l यह पृथ्वी पर असीमित मात्रा में उपलब्ध होते हैं मनुष्य इनका प्रयोग जब चाहे जितनी मात्रा में कर सकता है इनकी मात्र में कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता यद्यपि मानवीय क्रियाकलापों से यह संसाधन अनुपयोगी हो सकते हैं जैसे वायु प्रदूषण से हमें सांस लेने में कठिनाई होती है कुछ प्राकृतिक संसाधन मानवीय प्रयासों से भी उत्पन्न होते हैं जैसे पौधे को लगाकर हम वन संसाधन को बढ़ा सकते हैं l

(1.2) अनवीकरणीय संसाधन ( नॉन रिन्यूएबल रिसोर्सेस )

ऐसे प्राकृतिक संसाधन जो भूतकाल में निर्मित हुए तथा जिनका भंडार सीमित मात्रा में आ नवीकरणीय संसाधन कहलाते हैं इन संसाधनों का एक बार उपयोग कर लेने के बाद इन्हें पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता प्रकृति में उपलब्ध धातु की और जीवाश्म ईंधन कोयला पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस आदि नवीकरणीय संसाधन है क्योंकि ऐसे संसाधनों को पूरा निर्मित होने में हजारों लाखों वर्ष लग जाते हैं जो कि मानव जीवन की अवधि से बहुत ही अधिक है इसलिए ऐसे संसाधनों का संरक्षण बहुत ही आवश्यक है नहीं तो भावी पीढ़ी के लिए उपलब्ध नहीं होंगे

2.मानव निर्मित संसाधन :-

जब प्रकृति में उपलब्ध किसी पदार्थ का मूल रूप मानव द्वारा अपनी उपयोगिता के आधार पर बदल दिया जाता है तो वह मानव निर्मित संसाधन कहलाता है

मानव संसाधन :-

मनुष्य स्वयं भी एक विशिष्ट प्रकार का संसाधन है अतः लोगों को मानव संसाधन कहा जाता है मानव द्वारा प्रकृति का बेहतर उपयोग तभी किया जा सकता है जब उसके पास ज्ञान कौशल और तकनीकी उपलब्ध हो स्वास्थ्य और शिक्षा लोगों को बहुमूल्य संसाधन बनाने में मदद करती है

सतत पोषणीय विकास या ( सस्टेनेबल डेवलपमेंट ) क्या है :-

संसाधनों को इस प्रकार उपयोग करना कि वर्तमान की जरूरतों को पूरा हो सके तथा आने वाली पीढ़ी के लिए वह संसाधन बचा रहे इसे सतत पोषणीय विकास कहते हैं l

सतत पोषणीय विकास के क्षेत्र निम्नलिखित हैं:-

  1. पृथ्वी की जीवन शक्ति और विविधता का संरक्षण करना
  2. प्राकृतिक संसाधनों के नुकसान को न्यूनतम करना
  3. पर्यावरण के प्रति व्यक्तिगत व्यवहार और अभ्यास में परिवर्तन लाना
  4. समुदाय को अपने पर्यावरण की देखभाल करने योग्य बनाना
  5. मानव जीवन का गुणवत्ता को बढ़ाना

संयुक्त राष्ट्र संघ ने 25 सितंबर 2015 को सतत पोषणीय विकास के लिए 2030 तक 17 लक्ष्यों को पूरा करने का संकल्प लिया है l इन संकल्पों को पूरा करने हेतु भारत सहित विश्व के अनेक देशों ने अपनी सहमति प्रदान किए हैं l इन लक्ष्यों में 5p पर बल दिया गया लोग ( people), ग्रह ( planets), समृद्धि ( prosperity ), शांति (peace ) और भागीदारी ( partnership ) l संयुक्त राष्ट्र जलवायु निकाय ( यूएनएफसीसीसी ) के समक्ष भारत ने जलवायु परिवर्तन पर पहली योजना 2 अक्टूबर 2015 को सौंपी थी l जिसमें भारत ने वर्ष 2020 तक अपनी 40% ऊर्जा आवश्यकता को गैर जीवाश्म से प्राप्त करने पर जोर दिया l जैसे सूर्य ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा तथा बायोमास, परमाणु ऊर्जा से प्राप्त करने का वचन दिया है l