बाल साहित्य क्या होता है ?

बाल साहित्य क्या होता है ?

अक्सर शिक्षाविद् व शैक्षिक मनोवैज्ञानिकों के बीच यह प्रश्न उठता है कि बाल साहित्य क्या होता है ? एक आदर्श बाल साहित्य की क्या विशेषता होनी चाहिए ? तो इन सभी प्रश्नों का जवाब है । छोटी उम्र के बालकों को ध्यान में रखकर लिखा गया साहित्य ही बाल साहित्य कहलाता है।अगर हम ध्यान दे तो हमें पता चलेगा कि बाल साहित्य लेखन की परंपरा बहुत पुरानी है। बाल साहित्य का उद्देश्य बालकों को मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें जीवन की वास्तविक स्थिति से अवगत कराना होता है ।

बाल साहित्य में कहानियों के माध्यम से बच्चों को शिक्षा प्रदान करके उनका चरित्र व बौद्धिक विकास किया जाता है । श्री के पिल्लई बाल साहित्य के संदर्भ में चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट की स्थापना की गई थी यहां 5 वर्ष से लेकर 16 वर्ष के बालकों के लिए बेहतर बाल साहित्य उपलब्ध हैं। बाल साहित्य कैसा हो? बाल साहित्य के जनक कौन है ? बाल साहित्य की भूमिका ? बाल साहित्य की समीक्षा? बाल साहित्य क्या होता हैं? बाल साहित्य की पुस्तकें इत्यादि प्रश्नों का जवाब हम इस लेख में जानेंगे ।

ऐसी पुस्तकें जो बालकों में अध्ययन के प्रति रुचि उत्पन्न करती हैं, जिनसे बालकों को मनोरंजन होता हो एवं जिनसे बालकों की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति होती है वहीं वास्तविक बाल साहित्य होता है।

बाल साहित्य मुख्य रूप से 8 से 14 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों को ध्यान में रखकर लिखा जाता है । भारत में देश के पहले बाल साहित्यकार हरिकृष्ण देवसरे मध्य प्रदेश के थे । वे भारत में बाल साहित्य के क्षेत्र में पहले पीएचडी भी थे।

अच्छे बाल साहित्य की विशेषताएं :-

  • बाल साहित्य के शब्द साफ स्पष्ट एवं बड़े होने चाहिए।
  • बाल साहित्य मुख्य रूप से कहानी एवं कविता के रूप में होना चाहिए।
  • बाल साहित्य के शब्द एवं वाक्य बालकों में रुचि , जिज्ञासा तथा अभिलाषा उत्पन्न करने वाला होना चाहिए।
  • बाल साहित्य के शब्द बालकों के आयु के अनुसार होने चाहिए।
  • बाल साहित्य की कहानी एवं कविता के मुख्य पात्र बालक होते हैं जैसे ध्रुव श्रवण कुमार अभिमन्यु इत्यादि।
  • बाल साहित्य छोटे एवं सारगर्भित होते हैं।
  • बाल साहित्य नैतिक आधार पर होना चाहिए।
  • बाल साहित्य के पन्ने मोटे रंगीन आकर्षक एवं चित्र वाले होने चाहिए।
  • वह साहित्य जो वैज्ञानिक तथ्य व अन्वेषण पर आधारित हो इस प्रकार से बाल साहित्य उत्तम माने जाते हैं।
  • वह साहित्य जिसका आधार सुगठित वाक्य विन्यास हो।
  • वह साहित्य जिसका आधार कहानी , संवाद , एकांकी , जीवनी व कविता की विधा पर आधारित होगा उत्तम बाल साहित्य माना जाता।

बाल साहित्य का महत्व :-

  • बाल साहित्य के कई दृष्टि से महत्व है:-
  • मनोरंजन की दृष्टि से
  • ज्ञान वर्धन की दृष्टि से
  • भावार्थ विकास की दृष्टि से
  • साहित्यिक विधाओं में प्रवेश की आरंभिक तैयारी की दृष्टि से
  • बौद्धिक विकास की दृष्टि से
  • भावी लेखकों का अंकुरण करने की दृष्टि से
  • सामाजिक विकास की दृष्टि से
  • सुरुचि और सौंदर्यभाव जागरण की दृष्टि से
  • समसामयिक विषयों की जानकारी की दृष्टि से
  • पठन रुचि जागृत करके पुस्तकालय अध्ययन के
  • चरित्र निर्माण की दृष्टि से

बाल साहित्य कैसा हो? बाल साहित्य के जनक कौन है ? बाल साहित्य की भूमिका ? बाल साहित्य की समीक्षा? बाल साहित्य की पुस्तकें इत्यादि प्रश्नों का जवाब हम इस लेख में जाना ।