बहुकक्षा शिक्षण या बहुश्रेणी शिक्षण

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बहुकक्षा शिक्षण अथवा बहुश्रेणी शिक्षण क्या होता है?

वर्तमान समय में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर जनसंख्या वृद्धि के कारण विद्यालयों में छात्र संख्या तो निरंतर तेजी से बढ़ रही है परंतु उस अनुपात में शिक्षकों की संख्या अभी भी बहुत कम है। अनेक विद्यालय ऐसे हैं जहां एक ही अध्यापक कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को पढ़ा रहा है।

प्रत्येक कक्षा के लिए अध्यापकों की नियुक्ति एक जटिल समस्या बनी हुई है। इसके साथ एक विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं में अध्ययनरत छात्रों की व्यक्तिगत विभिन्नता, उपलब्धि, अभिरुचि तथा मानसिक परिपक्वता एक अलग से एक समस्या उत्पन्न करती है। अपनी मानसिक योग्यता, अभिरुचि और विकास क्रम की विशिष्टता के कारण एक ही कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों के अधिगम का स्तर भी भिन्न भिन्न होता है। इस समस्या के समाधान हेतु ऐसी शिक्षण युक्तियों और तकनीके अपनानी होंगी जिनके द्वारा एक ही समय में एक से अधिक कक्षाओं का संचालन सुचारु रुप से किया जा सके।

बहुकक्षा शिक्षण का अर्थ :-

बहुकक्षा शिक्षण जब शिक्षक के द्वारा एक कक्षा को ना देख कर कई कक्षाओं को देखा जाता है इसे बहुकक्षा शिक्षण प्रणाली कहते हैं। यह शिक्षण प्रणाली अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिलते जहां पर सभी कक्षाओं के लिए शिक्षक नहीं होते है। विद्यालयों में कक्षा कक्षों के अभाव में दो या दो से अधिक कक्षाओं को एक साथ पढ़ाना पड़ता है जिससे शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसी कमी को दूर करने के लिए की बहुकक्षा शिक्षण की व्यवस्था अपनाई जाती है। बहुकक्षा शिक्षण का आशय प्रभावी प्रबंध विधियों को अपनाकर व्यवस्थित शिक्षण से है। बहुकक्षा शिक्षण का सीधा अर्थ है एक शिक्षक द्वारा एक से अधिक कक्षाओं मे एक साथ पढ़ाना है। इसमें शिक्षक एक से अधिक कक्षा के बच्चों को एक साथ बैठाकर शिक्षण करता है। इस शिक्षण व्यवस्था के अंतर्गत शिक्षक की श्रम शक्ति, सूझबूझ और समय का अधिक उपयोग होता है।

बहुकक्षा शिक्षण को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए शिक्षक को पाठ्यक्रम, पाठ्य पुस्तकों, संदर्शिकाओं, समय विभाजन चक्र, मॉनिटर व्यवस्था, बैठक व्यवस्था बच्चों के विषय वार समूह को सही रूप में संचालित करना होता है। इसमें शिक्षण को एक से अधिक कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर शिक्षण कार्य करना होता है। बच्चों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर उन्हें समूह कार्य दिया जाता है जिससे बच्चों को एक दूसरे के साथ चर्चा करते हुए तथा एक-दूसरे को सहयोग देते हुए विषय को समझने का अवसर मिल जाता है। शिक्षक एक समूह को कार्य देकर दूसरे समूह के साथ कार्य करता है।

बहुश्रेणी या बहुकक्षा शिक्षण की व्यवस्था :-

बहुश्रेणी या बहुकक्षा शिक्षण आज एक अपरिहार्य आवश्यकता है। क्योंकि हमारे अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या प्रति विद्यालय 5 से कम है। बहुकक्षा गणित शिक्षण में शिक्षक को भाषा, गणित तथा पर्यावरण अध्ययन के साथ-साथ कला और कार्य अनुभव का भी शिक्षण करना अनिवार्य है। संज्ञानात्मक क्षेत्र के साथ ही यह संज्ञानात्मक क्षेत्र में भी बहुत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस शिक्षण में गीत, लोकगीत, नाटक, कविता, पाठ तथा अंत्याक्षरी आदि को विशेष महत्व प्रदान किया जाता है। यह क्रियाकलाप शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होते हैं।
बहुश्रेणी शिक्षण में मॉनिटर प्रणाली तथा प्रोजेक्ट प्रणाली का विशेष महत्व होता है। प्रोजेक्ट कार्य को करने के लिए बच्चों को समूहों में बांट दिया जाता है क्योंकि समूह में सीखना प्रत्येक शिक्षण विधाएं हेतु आवश्यक होता है। समूह के द्वारा उन में सहभागिता से कार्य करने की भावना जागृत होती है। वे एक-दूसरे के अभ्यास कार्य को स्वयं हल करते हैं। साथ ही साथ उनकी त्रुटियों का सुधार भी करते रहना चाहिए। ऐसा करने से सक्रिय अधिगम की स्थिति प्राप्त होती है। साथ ही अनुशासन भी बना रहता है। अध्यापक को ऐसा करने से अधिक समय मिल जाता है। जिसका वे अन्य यंत्र भी उपयोग कर सकता है।

बहुकक्षा में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए :-

  • शिक्षण विद्या प्रबंधन
  • संसाधन प्रबंधन
  • शिक्षण सामग्री प्रबंधन
  • पाठ्यपुस्तक प्रबंधन
  • स्थान प्रबंधन की जानकारी
  • समय विभाजन चक्र प्रबंधन की जानकारी
  • कक्षा कक्षों में बैठने की स्थिति की जानकारी
  • शिक्षकों एवं कक्षा कक्षों की संख्या की जानकारी
  • पाठ्य सहगामी क्रियाओं का प्रबंधन

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