बाल अधिकार (Children’s Right)

बाल अधिकार (Children’s Right)

बच्चों के अधिकार या बाल अधिकार क्या है? | Bal adhikar |children’s rights | बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण | Child Rights in Hindi | Bal adhikar | Children’s Rights |

बालक किसी भी समाज व राष्ट्र की बहुमूल्य संपत्ति होती है ।बालक के विकास से न केवल उसका बल्कि उसके परिवार, समाज और राष्ट्र का भविष्य भी जुड़ा हुआ होता है । इसीलिए बालक को राष्ट्र का भविष्य कहा गया है । प्रत्येक समाज को बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना अति आवश्यक है ।

शिक्षाविद और राजनीतिक तथा सामाजिक नेता जब भी बच्चों के समूह को संबोधित करते हैं । अक्सर यह उद्घोषणा करते हैं कि “आज के बच्चे कल के नागरिक हैं“ । माता-पिता और शिक्षक गण समाज और सरकार बच्चे के प्रति किस प्रकार अपने दायित्व का निर्वाह करते हैं । इस पहलू को ध्यान में रखते हुए बच्चों के अधिकार पर विचार करना बहुत जरूरी है । जब भी बच्चों के अधिकारों (बाल अधिकार ) की बात कही य सोची जाती है, तो उसका संबंध माता-पिता, अध्यापक, समाज व सरकार के दायित्वों से होता है ।

बाल अधिकार क्या है, कितने और कौन कौनसे अधिकार बाल अधिकार होते है, बाल अधिकारों की लिस्ट, बाल अधिकार हनन, बाल दुर्व्यवहार क्या है, बच्चों के कर्तव्य के बारे में Child Rights In Hindi इस लेख में बात करेगे.

बाल अधिकार क्या है (What are Child Rights) :-

1959 में बाल अधिकारों की घोषणा को 20 नवंबर 2007 को स्वीकार किया गया था । बाल अधिकार के तहत जीवन का अधिकार, पहचान, भोजन, पोषण, और स्वास्थ्य, विकास, शिक्षा और मनोरंजन, नाम और राष्ट्रीयता परिवार और पारिवारिक पर्यावरण उपेक्षा से सुरक्षा, बदसलूकी, दुर्व्यवहार, बच्चों का गैरकानूनी व्यापार आदि शामिल है।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग कानून 2005 के अनुसार बाल अधिकार में बालक/बालिकाओं के वे समस्त अधिकार शामिल है, जो 20 नवम्बर 1989 को संयुक्त राष्ट्र संघ के बाल अधिकार अधिवेशन द्वारा स्वीकार किये गये थे। तथा इसे भारत सरकार ने 11 दिसंबर 1992 में सहमती प्रदान की थी ।

बच्चों के अधिकार क्या हैं अधिकार और कैसे हो इनकी सुरक्षा :-

यूनाइटेड नेशन द्वारा जारी चाइल्ड राइट्स कंवेनशन पर सभी देशों ने हस्ताक्षर किए हैं, भारत भी उनमें से एक है। इसके अलावा भारतीय संविधान और राइट टू एजुकेशन जैसे अधिकारों ने बच्चों के हितों और हकों की हिफाजत के लिए बहुत-से दिशा-निदेर्श जारी किए हैं। इसके तहत :

  • सभी बच्चों के लिए बेहतर और जरूरी मेडिकल सुविधा (टीके आदि भी), अपंगता है तो विशेष सुविधा, साफ पानी, पौष्टिक आहार, स्वस्थ रहने के लिए साफ वातावरण आवश्यक है। सरकार को ये सुविधाएं उपलब्ध हों, यह सुनिश्चित करना चाहिए।
  • सभी बच्चों को 14 वर्ष की उम्र तक प्राथमिक शिक्षा मुफ्त उपलब्ध हो।
  • स्कूलों में बच्चों के शारीरिक व बौद्धिक विकास करने के साथ-साथ ऐसा कुछ न किया जाए जिससे उनकी गरिमा को ठेस पहुंचे।
  • बच्चों को अपने परिवार की भाषा और तौर-तरीके सीखने का पूरा अधिकार है। जो परिवार अपने बच्चों का भरण-पोषण करने में असमर्थ हों, उसको आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है।
  • बच्चों को शारीरिक शोषण व खतरनाक ड्रग्स से दूर रखना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना माता-पिता के साथ-साथ सरकार की भी जिम्मेदारी है।
  • राइट टू एजुकेशन ऐक्ट 2009 के तहत डॉक्यूमेंट्स के अभाव में किसी बच्चे को ऐडमिशन देने से नहीं रोका जा सकता है।
  • ऐडमिशन के नाम पर बच्चे का टेस्ट नहीं लिया जा सकता।
  • सभी प्राइवेट स्कूलों में गरीब वर्ग के लिए 25% सीट रिजर्व रहेंगे जिन पर आर्थिक रूप से कमजोर व पिछड़े वर्ग के बच्चों का अधिकार होगा।
  • बच्चों की सुरक्षा व उनके स्वास्थ्य की देखभाल राज्य सरकार का दायित्व होगा।
  • 14 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे की फैक्ट्री, माइंस और अन्य किसी भी खतरनाक काम में सेवाएं नहीं ली जा सकती हैं।
  • बच्चों के अधिकारों के संबंध में संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन 20 नवंबर 1989 को अपनाया गया था । इसमें बच्चों के अधिकारों से संबंधित कुल 54 अनुच्छेद है ।

कुछ महत्वपूर्ण बाल अधिकार निम्नलिखित है –

  • बच्चों के अधिकार
  • उत्तरजीविता का अधिकार
  • विकास का अधिकार
  • संरक्षण पाने का अधिकार
  • जन्म लेने का अधिकार
  • जीवित रहने और संरक्षण पाने का अधिकार
  • शिक्षा का अधिकार

उत्तरजीविता का अधिकार :- जन्म के बाद सर्वाधिक बुनियादी आवश्यकताओं के माध्यम से बच्चों को जीवित रहने का अधिकार है । इन बुनियादी जरूरतों में शामिल है भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य उपचार इत्यादि ।

विकास का अधिकार :- शिक्षा, खेलकूद व कौशल वे सभी बातें जो बच्चों के लिए पूर्ण शारीरिक, मानसिक विकास की दृष्टि से आवश्यक है l वह सभी बालकों के अधिकार के अंतर्गत आती हैं ।

संरक्षण पाने का अधिकार :- इस अधिकार के अंतर्गत माता-पिता व अभिभावकों से यह अपेक्षा की जाती है कि बच्चों को दुरुपयोग व शोषण के सभी स्वरूपों से बचाया जाएगा ।

जन्म लेने का अधिकार :- बच्चे को मां के गर्भ में आते ही यथा समय जन्म लेने का अधिकार हो जाता है । अतः यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मां की उचित देखभाल की जाए ताकि बच्चा गर्भ में पूर्ण एवं स्वस्थ रूप से विकसित हो तथा यथा समय जन्म ले सके । बच्चे के जन्म को रोकने का प्रयास से गर्भस्थ बच्चों के अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है और उसे कानून की नज़रो में एक अपराध माना जाता है।

भारतीय दंड संहिता की धारा 312 गर्भपात को एक अपराध मानती है । धारा 313, 314, 315,316 में ऐसे प्रावधान दिए गए हैं जिनमें अजन्मे बच्चों की सुरक्षा की बात कही गई है ।
भारतीय दंड संहिता की धारा 416 में यह व्यवस्था है कि यदि कोई महिला जिसके विरुद्ध न्यायालय ने मृत्युदंड सुनाया हो अगर वह स्त्री गर्भवती हो तो न्यायालय को यह अधिकार है कि मृत्यु दंड को आजीवन कारावास में बदल दिया जाए या सजा को स्थगित भी किया जा सकता है ।

जीवित रहने और संरक्षण पाने का अधिकार :- मां के गर्भ से दुनिया में अवतरित होने के पश्चात बच्चों को विकास और वृद्धि के लिए सभी प्रकार के संरक्षण का अधिकार होना चाहिए । शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि निर्धन वर्ग में बाल उत्तरजीविता लगभग 80% है, मध्य वर्ग में 85% व उच्च आय वर्ग में 89% है । राज्य को बच्चों की उत्तरजीविता के लिए किए जाने वाले उपायों व प्रयासों को प्राथमिकता प्रदान करना चाहिए ताकि बच्चों की उत्तरजीविता और संरक्षण के अधिकार की रक्षा की जा सके l

शिक्षा का अधिकार :– संविधान के 86 वें संशोधन 2002 के द्वारा अनुच्छेद 21 में 21 (क) जोड़कर शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया है l राज्य 6 वर्ष की आयु से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का उपबंध कराएगा

माता-पिता के संरक्षण पाने का अधिकार:- परिवार समाज की मूलभूत इकाई है परिवार के सभी सदस्य को संरक्षण प्रदान करना उसका प्रमुख दायित्व है शोषण के विरुद्ध संरक्षण का अधिकार भी आवश्यक है 1960 का बाल अधिकार अधिनियम अपेक्षित अथवा दोषी को पुनर्वास की बात कहता है बाल श्रम अधिनियम 1986 विशिष्ट उद्देश्य की प्राप्ति के लिए बनाया गया है

1 अप्रैल 2010 से निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 प्रभावशील कर दिया गया है इसके कुछ प्रमुख बिंदु है :-

  • 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप कक्षा में प्रवेश मिलेगा तथा आवश्यक दक्षता सीखने के लिए उपयुक्त व्यवस्था दी जाएगी
  • जन्म प्रमाण पत्र, स्थानांतरण प्रमाण पत्र आदि दस्तावेजों के अभाव में किसी बालक को विद्यालय में प्रवेश से मना नहीं किया जाएगा
  • सभी निजी विद्यालयों को अपने पड़ोस के क्षेत्र में रहने वाले सुविधा वंचित परिवारों के बच्चों को अपनी कुल उपलब्ध सीटों में से न्यूनतम 25% सीटें प्रवेश के लिए दी जाएंगे
  • किसी बच्चों को शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना नहीं दी जाएगी
  • सभी विद्यालय को निर्धारित मानदंड पूरे करना अनिवार्य होगा
  • उपरोक्त मौलिक अधिकारों के अलावा भी भारतीय संविधान में बच्चों के हितों की रक्षा के लिए अन्य प्रावधान भी किए गए जैसे
  • संविधान के अनुच्छेद 39(च) के द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि बच्चों और युवाओं का नैतिक और भौतिक परित्याग ना किया जाए यह दायित्व राज्य का होगा l
  • बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए उन्हें उचित परिवेश सुलभ करवाया जाएगा ।
  • यह सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है कि राष्ट्रीय हित की परवाह न करने वाले स्वार्थी व्यक्तियों से बच्चों को बचाया जाएगा।
  • बच्चों को स्वस्थ मनोरंजन के साधन प्रदान किया जाएगा l
  • अनुच्छेद 32 के द्वारा बच्चों को आर्थिक शोषण से रोकने की बात कही गई है ।
  • अनुच्छेद 34 के द्वारा बच्चों को यौन शोषण और यौन दुरुपयोग से बचाने का दायित्व राज्य को दिया गया है ।
  • अनुच्छेद 36 व 37 बच्चे का उत्पीड़न ना हो यह सुनिश्चित करने का दायित्व राज्य को दिया गया है।
  • 20 नवंबर को हर वर्ष बाल अधिकार दिवस मनाया जाता है l
  • 20 नवंबर को बालकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय कमीशन के द्वारा 20 नवंबर को सालाना एक राष्ट्रीय सभा आयोजित की जाती हैl
  • 20 नवंबर को पूरे विश्व में वैश्विक बाल दिवस या अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार दिवस के रूप में भी मनाया जाता है l
  • भारत में बच्चों की देखभाल और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए मार्च 2007 में राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा के लिए एक कमीशन या संवैधानिक संस्था का निर्माण भारत सरकार ने किया था l

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