Curves of Learning सीखने के वक्र

Curves of Learning  सीखने के वक्र

सीखने के वक्र का अर्थ  :- हम अपने दैनिक जीवन में कोई भी नया कार्य करते हैं या सीखते हैं तो प्रत्येक कार्य के सीखने में कुछ अंतर होता है । जैसे किसी कार्य को सीखने की8 गति तीव्र होती है । जबकि कुछ कार्य को सीखने गति धीमी होती है । यदि हम अपनी सीखने की इस गति को एक ग्राफ पेपर पर अंकित करें तो यह एक वक्र रेखा बन जाता है । इसी वक्र रेखा को सीखने का वक्र कहते हैं ।

हम दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि सीखने का वक्र सीखने में होने वाली उन्नति या अवनति को व्यक्त करता है।

सीखने की परिभाषा :-

गेट्स एवं अन्य के अनुसार  सीखने के वक्र अभ्यास द्वारा सीखने की मात्रा गति और उन्नति की सीमा का ग्राफ पर प्रकाशन करते हैं

Curve of learning give graphic representation of the amount rate and limit of improvement brought about by practice”  :- by Gates &others (p 353)

” A learning  curve is a graphic representation of a persons improvement in a given activities by skinner ” skinner (A–p 263)

वक्र व सीखने की विशेषता :-

अगर हम मनुष्य के सीखने के संबंध में  अध्ययन करें तो हमें मनुष्य के सीखने के वक्र प्राप्त होता है । इस वक्र के निम्नलिखित विशेषताएं हैं।

सीखने में उन्नति ( Improvement of Learning ) हम सीखने के वक्र को मोटे तौर पर तीन भागों या अवस्थाओं में बांट सकते हैं । प्रारंभिक अवस्था मध्या अवस्था और अंतिम अवस्था कह सकते हैं।
इन तीनों अवस्थाओं के सीखने में उन्नति के विषय में start & Oakden ने लिखा है कि
उन्नति की गति समान नहीं होती है।अंतिम अवस्था की तुलना में प्रारंभिक अवस्था में उन्नति की गति बहुत अधिक होती है।

सीखने की वक्र के अवस्थाएं:-

1. प्रारंभिक अवस्था Internal Stages  :-

आरंभ में सीखने की गति साधारणतया तेज होती है । परंतु यह आवश्यक नहीं है कि यह सदैव तेज ही हो ।सीखने की वक्र
गेट्स एंड आदर्श के अनुसार ” सीखने की प्रारंभिक गति बहुत तीव्र होती है पर इसको किसी भी दशा में सीखने की सार्वभौमिक विशेषता नहीं कहा जा सकता” ।

सीखने की गति कई विशेषताओं पर निर्भर करती है । यह सीखने की गति सीखने वाले की रुचि प्रेरणा जिज्ञासा उत्साह कार्य का पूर्व ज्ञान कार्य की सरलता या जटिलता  पर निर्भर करती है।
कुछ कार्यों में सीखने की प्रारंभिक गति अनिवार्य रूप से धीमी और कुछ में आवश्यक तेज होती है।
उदाहरण के रूप में हम कह सकते हैं कि  बालक द्वारा सर्वप्रथम पढ़ना सीखने में तथा एक व्यस्क व्यक्ति द्वारा विदेशी भाषा सीखने में प्रारंभ में कठिनाई आती है।

इसके विपरीत नृत्य सीखने में प्रारंभिक अवस्था में तीव्र गति होती है । क्योंकि सीखने वाले को शरीर का संतुलन करना होता है । इसी प्रकार जो बालक अंकगणित सीख चुके हैं उनकी बीज गणित सीखने की गति तीव्र होती है।सीखने की वक्र

2. सीखने की मध्य अवस्था Middle stage 

जैसे-जैसे एक व्यक्ति कार्य का अभ्यास करता जाता है। वह उस कार्य में उन्नति करते जाता है। परंतु उसके उन्नति का स्वरूप स्थायी नहीं होता क्योंकि यह कभी उन्नति करता है तो कभी अवनति करता है ।

स्किनर के अनुसार ” सीखने में प्रतिदिन चढ़ाव उतार आता है पर सीखने वाले को सामान्य प्रगति एक निश्चित दिशा में होती रहती है “।
इस अवस्था में सीखने की क्रिया में अवनति होने के कारण है । सिरदर्द लापरवाही, रात्रि जागरण, शक्ति का अभाव, ध्यान का विचलन और आवश्यकता से अधिक विश्वास करना इत्यादि। सीखने की वक्र

3. अंतिम अवस्था (Last Stage)

:- जैसे जैसे व्यक्ति सीखने की अंतिम अवस्था की ओर जाता है। वह उसे सीखने की गति प्रति की धीमी होती जाती है । और अंत में ऐसी अवस्था आ जाती है जब व्यक्ति सीखने की अंतिम सीमा पर पहुंच जाता है । इस सीमा के संबंध में ।

गेट्स एंड अदर्स ने लिखा है कि ” सिद्धांत रूप से तो सीखने की उन्नति को पूर्ण सीमा संभव पर व्यवहार में यह शायद कभी भी प्राप्त नहीं होती”।