निगमन विधि (Deductive Method)

निगमन विधि (Deductive Method) :-

निगमन विधि (Deductive Method) के द्वारा शिक्षण करते समय सामान्य नियम से विशिष्ट उदाहरणों की ओर अग्रसर हुआ जाता है। शिक्षक, छात्रों के सम्मुख पहले सामान्य नियम प्रस्तुत करता है । और इसके पश्चात उदाहरणों द्वारा नियम की सत्यता को प्रमाणित करता है। एवं विशिष्ट परिस्थितियों में उसके उपयोग को बताता है। अर्थात निगमन विधि में शिक्षक पहले नियम बताता है । उसके बाद उदाहरण बताता है।

निगमन विधि Deductive Method
निगमन विधि Deductive Method

निगमन विधि में सर्वप्रथम नियम या सिद्धांत प्रस्तुत किया जाता है। तथा उसके पश्चात उस नियम या सिद्धांत को विविध उदाहरणों में प्रयुक्त करके समस्या का समाधान किया जाता है । इस विधि में शिक्षक एक नियम को समझाने के लिए कई उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। जिससे छात्रों को वह नियम आसानी से समझ आ जाता है।

निगमन विधि के अनुसार शिक्षण करने पर विद्यार्थी नियमों का अन्वेषण का नहीं कर पाता है।शिक्षण अधिगम में क्रियाशील नहीं रहता निगमन विधि में छात्र क्रियाशील नहीं रह पाते । क्योंकि इस विधि के अनुसार वह नियम से उदाहरण की ओर नहीं बढ़ पाते । अतः छात्र की रुचि शिक्षण अधिगम में विकसित नहीं हो पाती तथा वह अर्जित ज्ञान को अधिक दिनों तक स्मरण नहीं रख पाता।

निगमन विधि साधारण तथा औसत से निम्न विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी सिद्ध होती है।

निगमन विधि कंहा-कंहा प्रयोग होती है?

निगमन विधि का उपयोग गणित, सामाजिक विषय, विज्ञान ,भूगोल तथा व्याकरण के शिक्षण में किया जाता है।

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