दूरस्थ शिक्षा क्या है ?

दूरस्थ शिक्षा क्या है? दूरस्थ शिक्षा का अर्थ

दूरस्थ शिक्षा “, दूरस्थ शिक्षा में विद्यार्थी कक्षा से दूर विभिन्न आधुनिक उन्नत संचार माध्यम से स्वतंत्र अथवा स्वतंत्र पूर्वक शिक्षा ग्रहण करते हैं। विद्यार्थी कि यह शिक्षक कक्षा अधिगम की अपेक्षा अधिक व्यवसायिक स्वतंत्रता रोजगार परक होती है। यह विद्यार्थी अपनी योग्यता तथा आवश्यकता के अनुरूप पाठ्यक्रम चयन के लिए स्वतंत्र होता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी सामाजिक उच्चता, आय वृद्धि तथा बढ़े हुए उत्तर दायित्व का निर्वहन भी कर सकता है।


दूरस्थ शिक्षा का अर्थ :-

दूरवर्ती शिक्षा एक बहुआयामी शिक्षा व्यवस्था है। इसे अनेक नामों से जाना जाता है। जैसे कि मुक्त अधिगम अथवा शिक्षा (Open Learning or Education) , पत्राचार शिक्षा Correspondence Education) , बाहरी अध्ययन (External Study) , गृह अध्ययन ( Home Study), एवं परिसर से बाहर अध्ययन (Off Campus Study) इत्यादि।

भारत मे इसे दूरस्थ शिक्षा तथा मुक्त शिक्षा के नाम से ही अधिक जाना जाता है। सैद्धांतिक रूप से इसे दूरस्थ शिक्षा से तात्पर्य
शिक्षा के ऐसे प्रचलित एवं अपरंपरागत उपागम से है जो परंपरागत शिक्षा के मानकों पर प्रश्नचिन्ह लगाता हो। इससे पृथक मापदंड को प्राथमिकता प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त दूरस्थ शिक्षा का एक अन्य महत्वपूर्ण तथा इसकी अपने तार्किक भाषा तथा संवाद विधि है । जो शिक्षण संस्थाओं से दूर निवास करने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने में उत्पन्न होने वाली समस्याओं के समाधान के परिणाम स्वरुप विकसित हुई है। दूरस्थ शिक्षा में मुद्रित तथा अमुद्रित बहुमाध्यमों का प्रयोग शिक्षक एवं छात्र के मध्य संचार माध्यम के रूप में किया जाता है।

दूरस्थ शिक्षा अधिगम तथा इसका स्वरूप :-

सामान्यता दूरस्थ शिक्षा एवं मुक्त अधिगम मुक्त शिक्षा अथवा पत्राचार शिक्षा ना तो एक दूसरे के पर्यायवाची हैं और ना ही प्रत्यक्ष रूप से एक अधिगम दूसरे का अधिगम है। वस्तुतः दूरस्थ शिक्षा अनेक प्रारूपों में अन्य से समानता रखता है।

दूरस्थ शिक्षा के निम्न घटक हैं :-

• मुक्त अधिगम
• मुक्त शिक्षा
• पत्राचार शिक्षा

मुक्त अधिगम (open learning) :- मुख्य रूप से मुक्त अधिगम दूरस्थ शिक्षा से समानता आवश्यकता है , परंतु इसका पृथक अस्तित्व है । सामान्य शब्दों में मुक्त अधिगम मानव मस्तिष्क की एक अवस्था है। मुक्त शिक्षा अधिगम पाठ्यक्रम तथा अधिगम आव्यूह के चयन और नियंत्रण में जहां तक संभव हो सके छात्रों को स्वतंत्रता प्रदान करता है।

मुक्त शिक्षा (open Education ) :- सामान्य रूप से मुक्त शिक्षा मुक्तता के सम्प्रत्यय पर आधारित है। इसका अर्थ है कि मुक्त शिक्षा एक ऐसी व्यवस्था है जो परंपरागत मान्यताओं के माध्यम से संचालित नहीं होती है। यह ज्ञात रहे कि पत्राचार शिक्षा संस्थानों तथा दूरस्थ शिक्षा संस्थानों का मुक्त शिक्षा संस्थान होना आवश्यक नहीं है। ये संस्थाएं मुक्त शिक्षा की संस्थाएं भी हो सकती है अथवा नहीं अथवा कुछ सीमा तक भी हो सकती है । इसी प्रकार से परंपरागत शिक्षण संस्थाएं भी कुछ मुफ्त शिक्षा प्रदान करने वाली हो सकती हैं।

पत्राचार शिक्षा :- पत्राचार शिक्षा एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था है जिसमें मुद्रित शिक्षा सामग्री को डाक के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रेषित की जाती है तथा अनुसार अन्य शिक्षणात्मक संप्रेषण कोविड-19 बारा प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाता है इस प्रकार के पाठ्यक्रमों में प्रवेश तथा परीक्षा की प्रक्रिया परंपरागत शिक्षा के अनुरूप ही होती है अर्थात परंपरागत रूप से सर्वप्रथम विद्यार्थी की प्रवेश परीक्षा ली जाती है उसके सफल होने के उपरांत उसे पाठ्यक्रम में प्रवेश दे दिया जाता है जब विद्यार्थी का प्रवेश हो जाता है तो उसे अध्ययन सामग्री डाक के द्वारा प्रेषित की जाती है अध्ययन अवधि की समाप्ति पर परंपरागत रूप से परीक्षा देनी होती है।

दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता :-

दूरस्थ शिक्षा के सफल संचालन एवं व्यवस्था हेतु निम्न तत्वों का सहारा लेना पड़ता है।

  • प्रिंटेड मैटेरियल यानी मुद्रित सामग्री :- यह माध्यम दूरस्थ शिक्षा ही नहीं बल्कि परंपरागत शिक्षा पद्धति का भी महत्वपूर्ण तत्व है। इसके अंतर्गत विभिन्न पुस्तकें अध्ययन सामग्री तथा पत्र-पत्रिका इत्यादि सम्मिलित होती हैं।
  • ऑडियो वीडियो मटेरियल यानी श्रव्य दृश्य सामग्री :- यह आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण तत्व है। परंपरागत शिक्षा की अपेक्षा दूरस्थ शिक्षा में इसका विस्तृत उपयोग होता है। इंटरनेट इसका सर्व प्रमुख माध्यम है। इसके अतिरिक्त इसमें विभिन्न स्लाइड , ऑडियो, वीडियो कैसेट तथा सीडी को सम्मिलित किया जाता है।
  • अध्ययन समूह यानी स्टडी ग्रुप :- वह छात्रों के मध्य अनौपचारिक संवाद , विचार-विमर्श तथा तर्क वितर्क कराने का मुख्य तत्व है। इसके माध्यम से विद्यार्थी में तार्किक क्षमता की वृद्धि होती है।
  • रेडियो तथा दूरदर्शन :- यह माध्यम सर्व सुलभ तथा सर्व व्यापक माध्यम है।
  • कंप्यूटर आधारित शिक्षण अधिगम ( कंप्यूटर ऐडेड टीचिंग लर्निंग) :- वर्तमान में शिक्षण अधिगम में कंप्यूटर अपनी व्यापक भूमिका का निर्वहन कर रहा है। कंप्यूटर पर कोई भी विद्यार्थी विभिन्न सॉफ्टवेयर कार्यक्रम तथा इंटरनेट के माध्यम से विश्व की कोई भी सूचना पलक झपकते ही प्राप्त कर सकता है।

दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व :-

वर्तमान समय के भौतिकवादी युग में शिक्षा को प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक आवश्यक तत्व बना दिया। यदि व्यक्ति अपने जीवन की प्रारंभिक अवस्था में निरक्षर ही रह जाता है तो वह प्रौढ़ अवस्था में अध्ययन कर सकता है। तथा यदि किसी व्यक्ति ने अपनी औपचारिक शिक्षा पूर्ण कर ली हो तो वह अपने जीवन में उन्नति के लिए दूरस्थ शिक्षा से जुड़ सकता है। इस प्रकार व्यक्ति निरक्षर हो अथवा साक्षर शिक्षा सभी के लिए महत्वपूर्ण है किंतु शिक्षा जब अपने सीमित संसाधनों के कारण सर्व सुलभ नहीं हो पाती तो शिक्षा के व्यक्तिगत व अनौपचारिक माध्यमों की आवश्यकता लेनी पड़ती है। दूरस्थ शिक्षा के वैकल्पिक साधनों के रूप में प्रयोग की जाती है।

आधुनिक युग में दूरस्थ शिक्षा की आवश्यकता को निम्नलिखित बिंदुओं को माध्यम से समझा जा सकता है।

  • दूरस्थ शिक्षा मुख्यता जीवन के प्रारंभिक समय में शिक्षा ना ग्रहण कर पाने वाले व्यक्तियों के लिए दुरुस्त शिक्षक घर बैठे ही उन्हें शिक्षा ग्रहण करने का अवसर प्रदान करती है।
  • उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड एवं उत्तराखंड इत्यादि में शिक्षा की स्थिति अभी चिंताजनक बनी हुई है । अतः इन राज्यों में दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से सुधार लाया जा सकता है।
  • वह क्षेत्र जहां पर शैक्षिक संस्थान उपलब्ध नहीं है वह विद्यार्थी दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से अधिक पाठ्यक्रम में प्रवेश पाठक शिक्षा को पूर्ण तथा उपयोगी बना सकता है।
  • इस प्रकार दूरस्थ शिक्षा की वर्तमान समय तथा परिस्थितियों में अत्यधिक मांग है इसकी सहायता से शिक्षा को सर्व सुलभ सर्व व उपयोगिता तथा रोजगार परक बनाया जा सकता है।

दूरस्थ शिक्षा के गुण :-

दूरस्थ शिक्षा एक आधुनिक अवधारणा है। दूरस्थ शिक्षा प्रणाली छात्रों को समान अवसर तथा चयन की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करती है। इससे विद्यार्थियों में उत्तरदायित्व की भावना जागृत होती है। निसंदेह औपचारिक शिक्षा समाज के एक ऐसे वर्ग तक सीमित रही है। परंपरागत शिक्षा व्यक्तिगत संचार पर आधारित है तथा दूरस्थ शिक्षा संचार के आधुनिक प्रारूप पर आधारित है। इस कारण दूरस्थ शिक्षा वर्तमान में ऐसे अनेक कार्य कर रही है जो कि परंपरागत शिक्षा नहीं कर सकती।

अतः दूरस्थ शिक्षा में निम्नलिखित गुणों को देखा जा सकता है :-

  • यह विद्यार्थी में सामान प्रत्यय का विकास करती है।
  • दूरस्थ शिक्षा सेवारत व्यक्तियों के लिए नवीन शिक्षा के विभिन्न आयामों को स्थापित करती है।
  • यह विद्यार्थियों के प्रवेश में सरलता तथा विभेदीकरण की आवश्यकता की पूर्ति करती है।
  • यह भारतीय संविधान के उद्देश्य तथा आशाओं को भी पूर्ण करने में सहायता करती है।
  • यह विद्यार्थी के धन, समय तथा गति का सदुपयोग करती है
  • दूरस्थ शिक्षा आधुनिक समय में शिक्षा की लगभग सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सहायक है।

दूरस्थ शिक्षा केे दोष या सीमाएं:-

  • किसी व्यक्ति को कुशलता पूर्वक प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है, जबकि उसका प्रशिक्षक उसके साथ हो।
  • बहुत से ऐसे प्रायोगिक विषय भी होते हैं जहां अध्यापक के अभाव में विषय का ज्ञान असंभव ही है। वहां पर दूरस्थ शिक्षा का उपयोग नहीं है।
  • दूरस्थ शिक्षा में परंपरा, सभ्यता, संस्कृति व ऐतिहासिक उपागमों के मध्य ज्ञान का उचित अभाव माना जाता है।
  • विकसित देशों की अपेक्षा विकासशील देशों में जहां प्रशिक्षण के सीमित संसाधन है। वहां विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करना एक गंभीर समस्या है । दूरस्थ शिक्षा में यह समस्या आधुनिक शैक्षिक विधि से दूर तो करने का प्रयास करता है परंतु अलवर के कारण यह पुन यथा संभव नहीं है।

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