शैक्षिक पर्यटन विधि (Educational Excursion or Field Trips)

शैक्षिक पर्यटन विधि (Educational Excursion or Field Trips)

प्रोफेसर रेन द्वारा विद्यालय पर्यटन विधि (school Excursion method ) का विकास किया गया था । शैक्षिक पर्यटन में शिक्षण विधि, शिक्षा की सहायक सामग्री तथा पाठ्यक्रम सामग्री क्रिया तीनों के गुण पाए जाते हैं। प्राथमिक स्तर पर खेल द्वारा अधिगम कराने में शैक्षिक भ्रमण का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है ।

रविंद्र नाथ टैगोर के अनुसार भ्रमण करते हुए सीखना (Teaching while walking) एक मनोवैज्ञानिक की विधि है। शिक्षा में खेल विधि के जन्मदाता फ्रोबेल को माना जाता है , लेकिन आधुनिक समय में हेनरी कोल्डवेल को अपने खेल विधि का सर्वाधिक प्रयोग व विकास किया है। उनके अनुसार शैक्षिक भ्रमण द्वारा अधिगम कराना खेल विधि द्वारा ही शिक्षण कराने के समान है । खेल विधि में छात्र खेलने के साथ-साथ सीखते भी हैं।

शैक्षिक पर्यटन प्रविधि स्थानीय पर्यवेक्षण द्वारा उद्योग, भौगोलिक परिस्थिति, व्यापार, बैंक, कचहरी, राजकीय इमारतों का वास्तविक अनुभव हुआ ज्ञान प्रदान करती है। शैक्षिक पर्यटन का आयोजन करने से पूर्व शिक्षक को भ्रमण के 20 – 25 दिन पहले निर्देश पत्र छात्रों को उपलब्ध करा देना चाहिए।

शैक्षिक भ्रमण विधि की उपयोगिता

  • छात्रों में नेतृत्व तथा प्रबंधन के गुणों का विकास होता है।
  • शैक्षिक पर्यटन विधि बाल केंद्रित तथा मनोवैज्ञानिक विधि है।
  • यह छात्रों को स्थाई अनुभव एवं ज्ञान प्रदान करती है।
  • धीमी गति से सीखने वाले छात्रों को भी पर्याप्त अधिगम हो जाता है।
  • छात्रों में मेल-मिलाप व सामूहिक भावनाओं, सहयोग,समन्वय की भावना का विकास होता है।
  • आनंदमय अधिगम प्राप्त होता है , क्योंकि कक्षा के रूचिहीन एवं कृत्रिम वातावरण से छुटकारा मिलता है।
  • सीखा हुआ ज्ञान आनंद की वजह से पक्का हो जाता है क्योंकि स्वाभाविक वास्तविक व प्राकृतिक वातावरण में सीखा हुआ ज्ञान सदैव स्मरण रहता है।
  • प्रकृति के प्रति आकर्षण बढ़ता है।
  • राष्ट्रीय एकता की वृद्धि होती है।
  • छात्रों में निरीक्षण शक्ति का विकास होता है।

शैक्षिक पर्यटन विधि की सीमाएं

  • शैक्षिक पर्यटन द्वारा जिन सूचनाओं तथा तथ्यों का ज्ञान दिया जाता है । वह सार्थक तो होते हैं परंतु समय धन तथा शक्ति के दृष्टि से अधिक महंगे होते हैं । वर्ष में एक या दो ही पर्यटनओं का आयोजन संभव होता है
  • शैक्षिक पर्यटन विधि प्रायः अधिक खर्चीली होती है।
  • कक्षा के जो छात्र गरीब होते हुए पर्यटन में भाग लेने में असमर्थ रहते हैं सभी छात्र इनका लाभ नहीं उठा पाते।
  • शैक्षिक पर्यटन को छात्र एक मनोरंजन के रूप में लेते हैं । इन का शैक्षिक महत्व नहीं होता है छात्र निर्देशन पत्र का उपयोग समुचित ढंग से नहीं करते।
  • पर्यटनो से अन्य विषय के कक्षा शिक्षण में रुकावट होती है अतः अवकाश के दिनों में उनकी व्यवस्था करनी चाहिए।

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