दक्षता आधारित शिक्षण (Efficiency Based Teaching)

दक्षता आधारित शिक्षण || Efficiency Based Teaching || dakshta adharit shikshan || दक्षता आधारित शिक्षण क्या है?

दक्षता आधारित शिक्षण कि आवश्यकता :- वर्तमान युग प्रतिस्पर्धा एवं प्रतियोगिता का युग है। बालक को ज्ञान प्राप्ति के साथ ही साथ समाज में विशिष्ट स्थान बनाने के लिए किसी क्षेत्र में विशिष्ट दक्षताएं प्राप्त करना अति आवश्यक है। दक्षताएं क्या होती है? दक्षताएं भौतिक एवं मानसिक दोनों क्षेत्रों में ही हो सकती हैं। छात्र को चिंतन समस्या समाधान, शब्द कौशल, कविता लेखन, गणितीय गणना, वाचन, भाषण, नृत्य तथा संगीत आदि में दक्षता प्राप्त करना चाहिए अथवा कंप्यूटर बागवानी डिजाइनिंग, भवन निर्माण, कार्पेंट्री, टंकण तथा चित्रकला, आशुलिपि जैसे कार्य में दक्षता प्राप्त करनी चाहिए क्योंकि दक्षता प्राप्त करने के बाद ही वह समाज में रहते हुए सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है। “यदि व्यक्ति के पास कोई दक्षता नहीं है तो उसका व्यक्तित्व एकपक्षीय बनकर रह जाता है”। इस आर्टिकल में हम तीन प्रश्नों के जवाब जानने का प्रयास करेंगे
• दक्षता आधारित शिक्षण का अर्थ
• दक्षता आधारित शिक्षण के उद्देश्य
• दक्षता आधारित शिक्षण विधि के सोपान

दक्षता आधारित शिक्षण का अर्थ :-

दक्षता आधारित शिक्षण से तात्पर्य है दक्ष अध्यापकों द्वारा ऐसे शिक्षण जो छात्रों को ज्ञान प्राप्ति में दक्ष बना सके। दक्षताओं का विकास तभी संभव है जब शिक्षार्थी किसी ज्ञान की इकाई को इस सीमा तक सीखे की वह उनके जीवन का अंग बन जाए। अध्यापन विज्ञान की शब्दावली में इसे मास्टरी लर्निंग अथवा ऑप्टिमम लर्निंग कहा जाता है। बहुत से विद्वान अधिगम के ऑटोमाइजेशनपर बल देते हैं। जिसका अर्थ है कि ज्ञान की इकाई विचार और क्रिया के मार्ग से होते हुए बच्चे के सहज जीवन चर्या का अंग बन जाए। इस प्रकार दक्षताआधारित शिक्षण के द्वारा छात्रों की दक्षता पर आधारित न्यूनतम अधिगम की संप्राप्ति करना है। जिससे छात्रों की दक्षता को सुनिश्चित किया जा सके।
अध्यापक बच्चों को 1 से 50 तक की गिनती सिखाना चाहते हैं तो शिक्षण में विभिन्न क्रियाकलापों t.l.m. व अन्य सामग्रियों के द्वारा गिनती की संख्या धारण वह पहचान आदि करवाएं।

उपरोक्त गतिविधि द्वारा बालकों में निम्नलिखित दक्षताएं विकसित हो जाती हैं।
• संख्याओं की धारणा
• संख्याओं की पहचान
• संख्याओं को लिखना
• संख्याओं को लिखने का निश्चित क्रम

इसी प्रकार यदि शिक्षक कक्षा 2 के बच्चे को हिंदी भाषा में कविता सिखाना चाहता है तो वह उचित लय, हाव-भाव, उतार-चढ़ाव आदि के साथ कविता को सुनाकर , अनुकरण वाचन कराकर, कठिन शब्दों का उच्चारण अभ्यास करा कर बच्चों से दूसरी कविताएं सुनने के द्वारा उनकी सहभागिता प्राप्त करके t.l.m. अन्य सामग्रियों के द्वारा बच्चों में भाषा संबंधी दक्षता का विकास कर सकते हैं।

भाषा से संबंधित दक्षताएं निम्नलिखित होती हैं
• सुनना
• बोलना
• पढ़ना
• लिखना

दक्षता आधारित शिक्षण के उद्देश्य –

  • सहयोग की भावना विकसित करना
  • शिक्षण के प्रति रुचि विकसित करना
  • ज्ञान को स्थायित्व प्रदान करना
  • प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करना
  • छात्रों को दक्ष बनाना
  • छात्रों में आत्मविश्वास का संचार करना
  • समाज में लोगों के जीवन रहन-सहन को उच्च स्तर पर बनाना
  • बालक का समाज में एक प्रमुख स्थान बनाने के लिए प्रेरित करना

दक्षता आधारित शिक्षण के सोपान :-

Efficiency Based Teaching के नियम लिखित सोपान है

  1. पूर्व तैयारी – उद्देश्य निर्धारण करना तथा सहायक सामग्री का उपयोग
  2. विषय वस्तु का प्रस्तुतीकरण
  3. नियम निर्णय का समन्वयीकरण, सूचीकरण
  4. अभ्यास
  5. अभ्यास कार्य के मध्य की गई त्रुटियों का शुद्धिकरण
  6. प्रयोग

जब छात्र अभ्यास कार्य के मध्य त्रुटियां करना बंद कर दे तो दक्षता विकास हेतु पुनः अभ्यासात्मक प्रयोग कराया जाए और इस प्रक्रिया को जब तक जारी रखा जाए जब तक छात्र वांछित दक्षता प्राप्त नहीं कर लेते।

दक्षता आधारित शिक्षण में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है –

  • छात्रों को अभ्यास कार्य के लिए अभिप्रेरित करने के लिए दक्षता को उनके तत्कालिक जीवन से संबंधित किया जाए।
  • छात्रों को आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाए।
  • दक्षता विकास हेतु छात्र तथा अध्यापकों को बड़े ही धैर्य के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए क्योंकि इसकी संप्राप्ति में समय भी लग सकता है।
  • शिक्षण में t.l.m. व अन्य शैक्षिक सामग्रियों का प्रयोग करके छात्रों के ज्ञान में वृद्धि करके दक्षता बढ़ाई जा सकती हैं।
  • दक्षता का कार्यक्षेत्र छात्रों के मानसिक स्तर अनुकूल होना चाहिए।
  • अभ्यास कार्य के समय बालकों की थकान का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
  • छात्रों को समय-समय पर मार्गदर्शन देना चाहिए।