Environmental Studies Class 3 -for CTET

एनसीईआरटी ENVIRONMENTAL STUDIES CLASS 3 की पुस्तक में पर्यावरण अध्ययन को एक एकीकृत विषय के रूप में सम्मिलित किया है । इस पुस्तक का मकसद बालकों को उनके आसपास से संबंधित पर्यावरण मुद्दों को जागरूक करना है। Environmental Studies .

  • बच्चे अपने आसपास के लोगों और चीजों को देखकर, समझ कर बहुत कुछ सीखते हैं , तथा बालक अपने पर्यावरण का अवलोकन करके अपना ज्ञान निर्मित करते हैं ।
  • इस उम्र के बालक जानवर शब्द का इस्तेमाल सभी तरह के जानवरों जैसे कीड़े, पक्षी, स्तनधारी आदि के लिए करते हैं ।इस उम्र के बालक जानवरों को बारीकी से वर्गीकरण नहीं कर पाते।
  • सभी जानवरों के चलने का ढंग भिन्न होता है, कुछ उड़ते हैं, कुछ तैरते हैं, कुछ पैरों की मदद से चलते हैं तथा कुछ पंखों की मदद से और कुछ अपनी पूछ कर सहारा लेकर चलते हैं।
  • जानवर अलग-अलग जगह रहते हैं ,इन्हें इनका आवास कहते हैं । अंग्रेजी में इनकी आवाज को हैबिटेट कहा जाता है ।
  • बालकों को जानवरों का रंग रूप चाल आवाज आदि देखना तथा उनकी नकल करना काफी अच्छा लगता है । जानवरों की निवेदिता देख उनके अलग-अलग समूह बनाने से ही वर्गीकरण करने की क्षमता का विकास होता है
  • बालकों को सृजनात्मक गतिविधियों जैसे उंगली और अंगूठे पर रंग लगाकर चित्र बनाना अच्छा लगता है ,उन्हें विभिन्न डिजाइन बनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए ।
  • जिगसॉ पजल खेल :- खेल में किसी चित्र के कई टुकड़े़े किये जाते हैं । इन चित्रों को पूरा करने के लिए काफी दिमाग़ लगाना पड़ता हैं । इस खेल को खेलने से बालकों में चीजों को क्रम अनुसार रखने की क्षमता विकसित होती है ।
Environmental studies.Class 3 NCERT

पत्ते नामक कविता कक्षा 3 हमारा पर्यावरण में विजेंद्र पाल सिसोदिया ने लिखी है ।

  • पौधों की परी एक खेल है, जिसमें पौधों की परी बोलती है तथा अन्य बालकों को उस पौधे को छूना होता है।
  • मशहूर कलाकार विष्णु चंद्राकर, इंदौर, मध्य प्रदेश के रहने वाले थे उन्होंने सूखे पत्तों से मनमोहक चित्र बनाए थे
  • पौधे के बारे में जानकारी लेने के लिए बच्चे अपने बड़ों से पूछते हैं ।
  • बालक को पेड़ पौधों से दोस्ती करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए इससे इससे बालको मे पौधों की देखभाल करना, उसको बारीकी से देखना आदि तथा पर्यावरण के प्रति लगाव बढ़ता है।

‘पानी रे पानी‘ पाठ में पानी नामक कविता श्री प्रसाद द्वारा की गई है।

  • बच्चों को क्रियाकलाप करने देखने तथा पूछने का मौका दिया जाना चाहिए।
  • बालकों का मकान तथा घर में अंतर स्पष्ट करें, मकान तब घर बनता है जब हम में एक परिवार रहता है।
  • चूहों में देखने की क्षमता कम होती है परंतु सूंघने, छूने, स्वाद वाली क्षमता बहुत तीव्र होती है।
  • गांधीजी के 150वीं वर्षगांठ के लिए स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत श्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में की थी । यह हमें एहसास दिलाता है , कि स्वच्छता हमारी जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि हमारा फर्ज भी है।
  • लिंग-हु-फेन यह एक डिश है जो सांप से बनाई जाती है यह डिस हांगकांग में बहुत ही प्रचलित है।
  • कश्मीर, यहां सरसों के तेल में बनी मछली बहुत पसंद किया जाता है।
  • गोवा में मछली को नारियल के तेल में पकाया जाता है इससे जिसका स्वाद अलग होता है।
  • केरल में यहां नारियल तथा टेपियोका बहुत पसंद किया जाता है टेपियोका जमीन के नीचे पैदा किया जाता है ।इसप्रकार यह दोनों ही घर के आंगन में तैयार किया जाता है
  • जो लोग बोल बस सुन नहीं पाते हुए अपनी बात विशेष इशारों द्वारा प्रेषित करते हैं।
  • व्यक्तिगत विभिन्नता की चर्चा कक्षा में किया जाना चाहिए जिससे इस विषय में संवेदनशीलता बढ़ाई जा सकती है।
  • बालकों को अपनी भावनाओं को विभिन्न तरह से व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए इससे इन में सृजनात्मक क्षमता का विकास होता है।
  • नाच से भी हम अपनी बात दूसरों तक पहुंचाते हैं नाच में इशारो के विशेष हाव-भाव का इस्तेमाल किया जाता है जिसे मुद्राएं कहा जाता है।
  • पक्षियों में उड़ने चलने और गर्दन घुमाने के तरीके भिन्न होते हैं।
  • मैंने झटके से अपनी गर्दन आगे पीछे करती है जबकि उल्लू अपनी गर्दन पीछे तक घुमा सकता है । पक्षियों के पंख अलग-अलग रंगों व डिजाइन के होते हैं । पंख उड़ने में मदद करते हैं साथ ही शरीर को गर्म रखते हैं ,पुराने पंख झड़ते हैं तथा समय-समय पर नई पंख आते रहते हैं ।

‘बादल आए’नामक कविता Environmental Studies हरीश निगम तथा चकमक ने लिखी है। (Environmental Studies )

  • खाद्य पदार्थों को कई तरह से पकाया जाता है जैसे सेककर, तलकर, भूनकर और भाप द्वारा ।
  • रेलगाड़ी नामक कविता की रचना हरेंद्र नाथ चट्टोपाध्याय ने की है ।
  • बालकों को चित्र देखने और समझने का मौका दिया जाए इससे उनमें अवलोकन का कौशल विकसित होता है ।
  • दीपाली घर की जिम्मेदारी के कारण 3 कक्षा से आगे नहीं पढ़ पायी ।
  • कहानियां में बालक रूचि लेते हैं तथा कहानियों के पात्र से संवेदनशीलता पैदा की जा सकती है।

ब्रेल लिपि से संबंधित महत्वपूर्ण फैक्ट

  • जो लोग देख नहीं पाते उनके पढ़ने का एक विशेष तरीका होता है जिसे ब्रेल कहा जाता है।
  • ब्रेल मोटे कागज पर एक नोकीले औजार से बिंदु बनाकर लिखा जाता है।
  • ब्रैल लिपि पर उंगली द्वारा स्पर्श करके पढ़ा जाता है
  • लुइस ब्रेल का जन्म फ्रांस में हुआ था
  • इनके द्वारा पढ़ने का विशेष विधि की खोज की गई इस विधि को ब्रेल लिपि कहा जाता है।
  • ब्रेल लिपि को छूकर पढ़ा जाता है यह लिपि 6 बिंदुओ पर आधारित है
  • रूढ़िबद्ध धारणाओं जैसे लड़का – लड़की में भेदभाव पर कक्षा में चर्चा संवेदनशीलता से होनी चाहिए इसे जेंडर विषमता कहते हैं ।
  • पहले बर्तन मिट्टी व पत्थर के बनाए जाते थे अब बर्तन मिट्टी को आग में पकाकर मजबूती से मनाया जाता है।
  • बच्चे द्वारा कागज की बुनाई और कपड़े पर छपाई करना हमारी पारंपरिक कला को बढ़ावा देता है । इससे बच्चों को अपने कला व सृजनात्मकता को बनाए रखने में मदद मिलता है
  • बालकों को नक्शे में प्रयुक्त चिन्हों का उनके दैनिक जीवन में कहां का सामना होता है इसका पता करें ।
  • टांका एक विशेष प्रकार का गड्ढा होता है जिसमें वर्षा का पानी एकत्रित किया जाता है इसके द्वारा बच्चों को पानी के महत्व पर बताया जा सकता हैं ।
  • बच्चों को पानी के महत्व की चर्चा करें इसके पुनः उपयोग कम प्रयोग पर बताएं।

विभिन्न राज्यों मे किस प्रकार घर बनाए जाते हैं l (Environmental Studies)

असम के घर

यहां बहुत वर्षा होती है इसलिए यहां लगभग 10 से 12 फीट ऊंचाई पर घर बनाए जाते हैं । यहां बास के खंभों पर घर बनाया जाता है घर अंदर से भी लकड़ी का होता है।

मनाली के घर

मनाली पहाड़ी इलाका है यहां वर्षा तथा वर्षा अधिक पड़ती है। यहां घर पत्थर तथा लकड़ी से बनाए जाते हैं।

राजस्थान के घर

राजस्थान, भारत के पश्चिमी भाग में स्थित एक राज्य है । यहां वर्षा बहुत ही कम होती है और खूब गर्मी पड़ती है यहां पर घर बनाने के लिए मिट्टी का प्रयोग किया जाता है। घरों की दीवारें बहुत मोटी बनाई जाती है ।घर की छत कटीली झाड़ियों की बनी होती है।

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