Environmental studies Class – 4 for CTET

Environmental studies Class – 4 for CTET एनवायरनमेंटल स्टडीज जिसे अंग्रेजी मे ENVIRONMENTAL STUDIES कहते है। Environmental Science और Environmental Stidies दोनों विषयों का कार्यक्षेत्र अलग है।

पर्यावरण का अर्थ होता है = परि+आवरण यानी चारो और घेरे होना। वास्तव मे पर्यावरण हमें चारो और से घेरे हुए है। कक्षा 4 कि NCERT मे भी यही बताया गया है। बालक के लिए पर्यावरण सब कुछ है जो उसे प्रभावित करती है। कक्षा 3 से पर्यावरण को पाठ्यक्रम मे शामिल करने का यही उद्देश्य है कि बालको को उनके आसपास कि वस्तुओ से उनका संबंध स्थापित करना। पर्यावरण अध्ययन का यही उद्देश्य हैं।

1जुगाड़ गाड़ी यह मोटर बाइक की तरह दिखती है परंतु पीछे से लकड़ी के फट्टों से बनी होती है।
2. पहाड़ी इलाकों में बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए बर्फ पर पैर जमा कर चलना होता है।

3. पक्षिओ के कान बाहर नहीं दिखते, लेकिन सिर के दोनों तरफ छोटे-छोटे छेद होते हैं। यह छेद बालो से ढके रहते इन्हीं की मदद से पक्षी सुनते है।

4. छिपकली तथा मच्छर के भी कान होते है। मगर बहुत छोटे होने के कारण हमें दिखाई नहीं देते।

5. जानवरों के शरीर पर डिजाइन उनके शरीर पर बाल के कारण होते हैं।

6. जिन जानवरों के शरीर पर बाल होते हैं तथा कान बाहर दिखाई देते है वह जानवर बच्चे देते है। जैसे कुत्ता, बिल्ली, सियार इत्यादि।

7. जिन जानवरों की कान बाहर दिखाई नहीं देते तथा शरीर पर बाल भी नहीं होते वे अंडे देते है। जैसे छिपकली, मेंढक इत्यादि।

8.  एक व्यस्क हाथी 1 दिन में 100 किलोग्राम से ज्यादा पत्ते तथा  झाड़ियां खा लेता है।

हाथी के विषय में महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • हाथी 1 दिन में केवल 2 से 4 घंटे में सोता है।
  • हाथी को पानी तथा कीचड़ में खेलना काफी पसंद है।
  • हाथी के कान पंखों की तरह होते हैं। हाथी इनके मदद से हवा का कार्य करता है।
  • 3 माह का हाथी के बच्चे का वजन 300 किलोग्राम होता है।
  • हाथी झुंड में रहना पसंद करते हैं।
  • हाथियों के झुंड में केवल हथिनीया और उनके छोटे बच्चे ही होते हैं।
  • झुंड की मुखिया बूढ़ी हथिनी होती है।
  • एक झुंड में 10 से 12 हथिनी तथा उनके बच्चे होते हैं।
  • हाथी 10 से 15 वर्ष तक ही झुंड में रहता है फिर वह झुंड छोड़ देता है अकेले रहने लगता है।
  • हाथी परेशानी में एक दूसरे की मदद करते हैं तथा अपने बच्चों की देखभाल और सुरक्षा के लिए एक दूसरे का साथ देते हैं

9. बगुला भैंस की पीठ पर बैठकर सूक्ष्मजीवों को खाता है। इससे भैंस को भी फायदा होता है इसे सहजीवी कहते है।

10. खेजडली  नामक गांव, राजस्थान के जोधपुर में है इस गांव का नाम खेजड़ली  यहां पर पाए जाने वाले वृक्षों जिसे खेजड़ी कहते हैं के नाम पर पड़ा हैं Environmental studies Class – 4 for CTET

11. खेजड़ी वृक्ष

12. खेजड़ली गांव के लोग बिश्नोई कहलाते हैं बिश्नोई पेड़ो तथा जानवरों की रक्षा करते हैं।

  • खेजड़ी वृक्ष रेगिस्तानी इलाकों में बहुतायत में पाए जाते है।
  • इस वृक्ष को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती।
  • इस पेड़ की छाल दवा के काम आती है।
  • इस वृक्ष की लकड़ी मे कीड़े नहीं लगते है।
  • इस वृक्ष से फलिया प्राप्त होती है जिससे सब्जी बनाई जाती है।

13. अनिता कुशवाहा बिहार कि मुजफ्फरपुर जिले की रहने वाली है। अनीता एक चमकता सितारा है जिसे स्टारगर्ल कहते है। स्टार गर्ल वो लड़की होती है जो स्कूल पहुंचकर अपने अपनी जिंदगी बदल चुकी होती है।

14. राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009 मे  6 से 14 साल के सभी बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है।

15. मुजफ्फरपुर में लीची के पेड़ बहुतायत में पाए जाते हैं। लीची के पेड़ मधुमक्खियों को आकर्षित करते है। मुजफ्फरपुर के लोग मधुमक्खियों को पाल कर शहद एकत्रित करते हैं। इन शहद को बेचकर अपनी आमदनी प्राप्त करते हैं।

16. अक्टूबर से दिसंबर तक इसका समय मधुमक्खियों के अंडे देने का होता है यही समय मधुमक्खियों के पालने का उचित होता है l
17.  लीची के फूल फरवरी में खििलते हैं। बक्से में 12 किलोग्राम शहद इकट्ठा हो सकता है। Environmental studies Class – 4 for CTET

18. मधुमक्खियां

  • हर छत्ते में एक रानी मधुमक्खी होती है जो अंडे देती है।
  • छत्ते में नर मधुमक्खी होती है और बहुत सारी मजदूर मधुमक्खियां भी होती हैं।
  • मजदूर मधुमक्खियां दिन भर काम करती है।
  • शहद के लिए फूलों का रस चूसती है।
  • जब किसी मधुमक्खी को रस मिल जाता है तो विशेष प्रकार का नृत्य करती है जिससे दूसरी मक्खियां भी उस तरफ आकर्षित हो जाए।
  • छत्ता बनाने का काम तथा बच्चों को पालने का काम मजदूर मुखिया ही करती हैं।
  • नर मधुमक्खी के छत्ते के लिए कुछ खास काम नहीं करते।

19.चीटियां भी मिल जुल कर रहती हैं। सभी चीटियों का कार्य बटा होता है। रानी चिटिया अंडे देती है। सिपाही चीटियां बिल का ध्यान रखती है और मजदूर चीटियां भोजन एकत्रित करने का कार्य करती है।

20. दीमक, ततैया भी इसी तरह समूह में रहते हैं।

21. वलसाड, गांधीधाम, अहमदाबाद  तथा कच्छ आदि क्षेत्र गुजरात में स्थित है।

22. गोवा से केरल के बीच रेल द्वारा 92 सुरंग और 2000 पुल पड़ते हैं।

23. वलियम्मा  :- मलयालम में मां की बड़ी बहन को वलीगम्मा कहते हैं।

24. अम्मूमा :- मां की मां को यानी नानी को मलयालम में अम्मूमा कहा जाता है।

25.  फैरी :- पानी में आने जाने का साधन एक प्रकार की नाव होती है। केरल के कई भागों में एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए फैरी का प्रयोग किया जाता है । Environmental studies Class – 4 for CTET

26. रेलवे टाइम टेबल से हम कई जानकारियां इकट्ठा कर सकते है। जैसे ट्रेन कब आएगी कब पहुंचेगी , यात्रा में कितना समय लगेगा, किराया कितना है आदि आदि।

 27. गांधीधाम  (गुजरात) से नागरकोइल ( केरल ) के बीच ट्रेन द्वारा तय की गई दूरी 2649 किलोमीटर है। दोनों के बीच 14 स्टेशन पड़ते है।

28. आंध्र प्रदेश में लोगों द्वारा एक विशेष कैंप लगता है। इस कैंप में शादीशुदा लड़कियों को पुनः स्कूल भेजा जाता है। ताकि वह अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी कर सके।

29.शादी हेतु लड़की की उम्र 18 वर्ष तथा लड़के की उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए।

30. कर्णम मल्लेश्वरी एक वेटलिफ्टर थी। यह आंध्र प्रदेश की रहने वाली थी। इन्होंने 130 किलोग्राम तक वजन उठा रखा है। इन्होंने भारत के बाहर 29 मेडल जीते हैं।

31. फूलों की घाटी उत्तराखंड में स्थित है , जबकि शांत घाटी केरल में स्थित है।

32. मधुबनी चित्रकारी

  • मधुबनी चित्रकारी की बहुत ही प्राचीन प्रथा है।
  • यह बिहार में मधुबनी नाम के एक जिला मे काफ़ी प्रचलित है।
  • यहां त्योहारों पर घर की दीवारों, आंगन में विशेष चित्र बनाया जाता है इसलिए इस चित्र का नाम मधुबनी पड़ा है।
  • मधुबनी चित्र बनाने के लिए रंग प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले वस्तुओं से बनाए जाते हैं।
  • चित्र पिसे हुए चावल के घोल में रंग मिलाकर बनाया जाता है।
  • रंग बनाने के लिए हल्दी गुड़हल, नील, फूल, पेड़ों का रंग इस्तेमाल किया जाता है।
  • मधुबनी चित्रकारी में चित्र पर फूल, पंछी मछलियां और अन्य कई जीव जंतु आदि प्रकृति का चित्रण झलकता है।

33. फूलों का उपयोग दवाइयों में भी किया जाता है।

34. उत्तर प्रदेश में कचनार की फूलों की सब्जी बनाई जाती है।

35.  केरल में केले के फूलों की सब्जी बनाई जाती है।

36. महाराष्ट्र में सहजन के सहयोग की पकौड़ी बनते है।

37. उत्तर प्रदेश का कन्नौज जिला इत्र के लिए मशहूर है। यहां गुलाब की पंखुड़ियों से गुलाब जल तथा इत्र बनाया जाता है। इसलिए कन्नौज को इत्र नगरी भी कहा जाता है।

38.  डेरा गाजी खान नामक जगह पाकिस्तान में स्थित है।

39. मिट्टी में गोबर मिलाकर लीपने से मिट्टी में कीड़े नहीं लगते।

40. सोहना गांव हरियाणा में स्थित है। यहां घर बनाने के लिए लोगो द्वारा आसपास के उपलब्ध वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है।

41.  प्याज के बीज बोने के 20 दिनों के बाद छोटे-छोटे पौधे निकल आते हैं।

42. गिजुभाई बधेका गुजरात के रहने वाले थे। वे बच्चों के लिए मजेदार किस्से कहानियां और पत्र लिखते थे। उनकी लिखे पत्रों में पर्यावरण तथा पक्षियों के बारे में बताया गया है।

43. कल चिड़िया (इंडियन रोबिन)  यह अपना घोंसला पत्थरों के बीचों बीच बनाती है तथा इसका घोसला घास से बना होता है।इसके ऊपर पौधों की नाजुक टहनी, जड, ऊन, बाल रूसब बिछा होता है। Environmental studies Class – 4 for CTET

44.  कौवा अपना घोंसला लोहे की तार तथा लकड़ी की शाखाओं जैसी चीजों से बनता है। कौवा पेड़ की ऊंची डाल पर अपना घोंसला बनाता है।

45. कोयल अपना घोंसला नहीं बनाती तथा अपना अंडा कौवा की घोसले में देती है। कौवा अपने अंडों के साथ कोयल के अंडे को भी सैता है।

46. फाख्ता पक्षी अपना घोंसला कैक्टस के कांटो की बीच तथा मेहंदी की मेढ़ में बनाता है।

47. गौरय्या आमतौर पर घर में या आसपास कहीं भी घोंसला बना लेती है। अलमारी के पीछे दरवाजे के पीछे इत्यादि जगह पर अक्सर देखने को मिलता है।

48. कबूतर भी ऐसी जगह अपना घोंसला बनाता है। जैसे पुराने मकानों में या खंडहरों में ।

49. बसंत गोरी पेड़ के तने में गहरा छेद बनाकर उसमें अंडे देती है।

50. दर्जिन चिड़िया अपनी चोंच से पत्तों को सी लेती है इसके बीच में अंडा देती है यही इसका घोंसला होता है।

51. नर वीवर पक्षी घोंसला बनाता है। मादा वीवर उन सभी  घोंसलो को देखती है। इनमे से जो सबसे अच्छा लगता है उसमें अंडा देती है।

52. शक्कर खोरा यह पक्षी पेड़ कि डाली पर अपना लटकता घोंसला बनाता है। इसका घोंसला बाल, बारिक घास, पतली टहनिया सूखे पत्ते, पेड़ की छाल के टुकड़े और कपड़े की चिथड़ों से बनती है।

53. बिल्ली के दांत नुकीले होते हैं, जो मांस फाड़ने और काटने का काम आते हैं।

54. गाय के आगे के दांत छोटे होते है। जबकि पत्तो को काटने के लिए घास चबाने के लिए पीछे के दांत चपटी और बड़े होते हैं।

55. सांप के दांत नुकीले  होते हैं पर यह शिकार को चबाता नहीं बल्कि निगल जाता है।

56. गिलहरी के दांत हमेशा बढ़ते रहते हैं। दांतो को बराबर रखने के लिए ये हमेशा कुतरती रहती हैं।

57. भीम संघ यह बच्चों की पंचायत हैं। कर्नाटक के होल गुंडी गांव में पानी की समस्या थी भीम संघ ने पानी की समस्या का समाधान ढूंढा था।

58. रेगिस्तानी ओक

  • यह वृक्ष ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है।
  • यह अपनी ऊंचाई के लगभग 30 गुना जमीन के नीचे फैला होता है।
  • इसकी जड़े जमीन में गहरी जाती रहती है।
  • जब तक कि पानी ना मिल जाए। इस वृक्ष के पानी में पानी जमा होता है ।
  • लोग इस वृक्ष के तनों में पतला पाइप डालकर पानी निकाल लेते हैं

59. बिहू का त्योहार चावल की नई फसल कटने पर मनाया जाता है। बिहू 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है। पहले दिन को उरुका कहते हैं। इस दिन अस्थाई छप्पर बनाया जाता है जिसे भेला घर कहा जाता है।

60. ओस, अमन तथा बोरा चावल की विभिन्न किस्में है।

61. अबू धाबी , संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी हैं । यहां सिर्फ खजूर के पेड़ ही दिखाई देते है। यहां की मुद्रा दिरहम है। गर्मी ज्यादा होने के कारण लोग सूती वस्त्र पहनते है। तेज धूप से बचने के लिए शरीर तथा सिर को ढक कर रखते है।

62. केरल में घर के आंगन में मसालों का बगीचा होता है। वहां तेजपत्ता , छोटी इलायची , बड़ी इलायची।

CTET कि परीक्षा मे NCERT से जितने भी प्रश्न बन सकते थे सभी फैक्ट को इस आर्टिकल मे समाहित कर दिया गया हैं l Environmental studies Class – 4 for CTET

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