आगमन विधि (Inductive Method)

आगमन विधि यानी Inductive Method आज हम इस आर्टिकल में Inductive Method के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे l यह आर्टिकल आप के CTET KVS DSSSB UPTET सभी राज्यों कि परीक्षाओ हेतु महत्वपूर्ण है l आगमन विधि, Inductive Method, aagman vidhi

आगमन विधि (Inductive Method) :

यह विधि विशिष्ट से सामान्यीकरण की ओर सिद्धांत पर आधारित है। इस विधि में बालकों का ध्यान अनेक विशिष्ट उदाहरणों पर केंद्रित कर उनकी सहायता से सामान्यीकरण द्वारा सिद्धांत निकलवाए जाते हैं। इसके उपरांत प्राप्त सिद्धांत की सत्यता सिद्ध करने के लिए शिक्षक कुछ और उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसके पश्चात शिक्षक छात्रों से नियम निकलवाता है।

शिक्षण की आगमन विधि में शिक्षक अनेक विशिष्ट उदाहरणों के आधार पर समान्यीकरण करने का प्रयास करता है।
इसका अर्थ की शिक्षक कोई भी कंसेप्ट समझाने से पहले विद्यार्थी के समक्ष कई सारे उदाहरण प्रस्तुत करता है । उसके बाद वह मुख्य पाठ की तरफ आता है।

विद्यार्थी शिक्षक के द्वारा प्रस्तुत विशिष्ट उदाहरणों का निरीक्षण करके अपनी सूझबूझ के द्वारा सामान्य नियमों का प्रतिपादन करता है । शिक्षक के द्वारा दिए गए विभिन्न उदाहरणों को विद्यार्थी शब्द का अवलोकन निरीक्षण करके एक सामान्य नियम पर पहुंचता है।

आगमन विधि में शिक्षक विशिष्ट से सामान्य के शिक्षण सूत्र का उपयोग करता है । इस विधि में विद्यार्थी स्वयं क्रियाशील रहकर अपने निरीक्षण ,तर्क तथा विवेचन के आधार पर पहले विशिष्ट उदाहरणों को संकलित करते हैं। तथा फिर उनमें समानता देखकर किन्हीं सामान्य निष्कर्ष पर पहुंचने का प्रयास करते हैं। इस शिक्षण विधि में जो छात्र क्रियाशील रहते हैं ।

छात्र निरंतर अवलोकन निरीक्षण के माध्यम से सीखते हैं। शिक्षक का कार्य तो उपयुक्त परिस्थितियों का निर्माण करना होता है । अर्थात विशिष्ट के संकलन में तथा समानता की खोज में सहायता करना मात्र रह जाता है। इसमें मुख्य कार्य विद्यार्थियों का होता है। शिक्षक का कार्य केवल दिशानिर्देश होता है। वह केवल उदाहरण प्रस्तुत करते हैं । छात्र इन उदाहरणों से नियम की तरफ जाते हैं।

आगमन विधि (Inductive Method) के लाभ :-

  • आगमन विधि से शिक्षण करते समय शिक्षार्थियों की पाठ में पर्याप्त रुचि बनी रहती है ।
  • वे स्वयं ज्ञान अर्जन की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से तल्लीन रहते हैं l
  • छात्र जितना अधिक रुचि लेगा पाठ उतना ही मनोरंजक होता जाएगा और ज्ञान स्थाई रहेगा।
आगमन विधि Inductive Method
आगमन विधि Inductive Method
  • इस विधि से शिक्षण करने पर शिक्षण कार्य की तीव्र गति से अग्रसर होते हैं।
  • इस विधि में मंदबुद्धि बालक को कोई विशेष लाभ नहीं उठा पाते क्योंकि विद्यार्थियों को स्वयं उदाहरणों से नियम क्यों जाना होता है ।
  • इसलिए मंदबुद्धि बालक के लिए यह नियम उपयुक्त नहीं है।
  • मंदबुद्धि बालक उदाहरणों से सामान्य नियम तक नहीं पहुंच पाता
  • कुछ बालक अधिक समय लेने के कारण शीघ्रता से पढ़ाने वाले शिक्षक इस विधि का समुचित ढंग से उपयोग नहीं कर पाते

आगमन विधि का उदाहरण :-

हम विभिन्न धातुओं की सलाखें लेकर उसके एक सिरे को गर्म करते हैं बालक दूसरे सिरे को छू कर देखेंगे कि उस धातु का दूसरा सिरा भी गरम हो रहा है तो वह इससे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि समस्त धातु में ऊष्मा के सुचालक होती है।

इसी प्रकार गणित शिक्षण में भी उदाहरणों तथा मुख्य समस्याओं के आधार पर नियम बनाए जाते हैं। भाषा में भी व्याकरण पढ़ाने के लिए यह विधि अत्यंत उपयोगी है। इसमें नियमों को पहले ना बता कर उदाहरण प्रस्तुत किए जाते हैं और फिर नियम बताए जाते हैं। यह विधि मनोवैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित है कि क्रिया सर्वप्रथम विशिष्ट की ओर होती है समान्यीकरण की अवस्था बाद में आती है।

आगमन विधि के पद :-

  • उदाहरण :- शिक्षक विभिन्न उदाहरणों का चयन कर विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत करता है।
  • निरीक्षण:- विद्यार्थी समस्त उदाहरण का अवलोकन कर आपस में तुलना करता है उनमें समानता देखता है और एक परिणाम पर पहुंचता है।
  • नियमीकरण :- विद्यार्थी एक परिणाम पर पहुंचकर नियम का निर्माण करता है।
  • परीक्षण :- विद्यार्थी कुछ अन्य उदाहरण द्वारा नियम की सत्यता की जांच करता है।

आगमन विधि की विशेषताएं

  • विद्यार्थी इस विधि के द्वारा स्वयं परिश्रम करता है।
  • विद्यार्थी स्वाभाविक रूप से ज्ञान प्राप्त करता है।
  • विद्यार्थियों को अन्वेषण तथा खोज करने का प्रोत्साहन मिलता है।
  • विद्यार्थी में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित होती है।
  • इस विधि से अध्ययन करना सरल, रोचक बन जाता है।
  • यह विधि प्रत्यक्ष तथ्यों पर आधारित है।
  • यह एक वैज्ञानिक विधि है।
  • यह छोटी कक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी है।
  • इस विधि द्वारा प्राप्त ज्ञान स्थायी होता है।

आगमन विधि की सीमाएं :-

  • इस विधि में ज्ञानार्जन की गति बहुत धीमी होती है।
  • यह बड़ी कक्षाओं के लिए कम उपयोगी है।
  • शिक्षक द्वारा नियम विद्यार्थियों को पहले से ना बताएं।
  • उदाहरण बहुत ही रोचक एवं आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
  • उदाहरणों का चयन विद्यार्थियों के बौद्धिक स्तर के अनुकूल होना चाहिए।

आगमन विधि का प्रयोग कहां किया जाता है?

आगमन विधि का प्रयोग गणित, मनोविज्ञान, भूगोल, विज्ञान, प्रबंधन, समाज विज्ञान तथा भाषा जैसे विषयों के शिक्षण में आसानी से किया जाता है l

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