अधिगम अक्षमता , अधिगम अशक्तता, अधिगम विकार , (Learning Disabilty)

अधिगम अक्षमता , अधिगम अशक्तता, अधिगम विकार , Learning Disabilty

अधिगम अक्षमता शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1963 ई. में सैमुअल किर्क द्वारा किया गया था। और इसे निम्न शब्दों में परिभषित किया था।
अधिगम अक्षमता को वाक्, भाषा, पठन, लेखन अंकगणितीय प्रक्रियाओं में से किसी एक या अधिक प्रक्रियाओं में मंदता, विकृति अथवा अवरूद्ध विकास के रूप में परिभाषित किया जा सकता हैं ।
अधिगम संबंधी समस्याओं से ग्रसित बालकों के लिए इन्होंने अधिगम अक्षमता शब्द का प्रयोग किया था । अधिगम अक्षमता अधिगम विचलन अधिगम विकार या इन्हें लर्निंग डिसेबिलिटी के रूप में व्यक्त किया जाता है।

अधिगम अक्षमता या अधिगम अशक्तता क्या है ?

कुछ छात्र पढ़ने , लिखने , मौखिक अभिव्यक्ति , शब्दों की वर्तनी करने , गणित एवं तर्क शक्ति को समझने आदि में अशक्त अथवा कमजोर होते हैं । इस प्रकार की अशक्तता को ही अधिगम अशक्तता या अधिगम अक्षमता कहा जाता है।

अधिगम अक्षम बालक कौन है:-

जो बालक अधिगम अक्षमता से ग्रसित होगा । उस बालक को अधिगम अक्षम बालक , अधिगम विकार बालक , लर्निंग डिसेबिलिटी बालक आदि कहा जाता है ।

अधिगम और शिक्षण में कौन-कौन से बालक आते हैं?

अधिगम आज सक्षम बालक को की सूची में चार प्रकार की बालक आते हैं
• डिस्लेक्सिया
• डिसग्रफिया
• डिस्केलकुलिया
• डिसफेसिया

अधिगम अक्षमता के लक्षण :-

हालाहेन व टरबर नामक मनोवैज्ञानिकों ने लर्निंग डिसेबिलिटी के निम्नलिखित लक्षण सुझाए हैं:
• इन बालकों में अतिसक्रियता पाई जाती है।
• प्रत्यक्षीकरण गति बाधिता होती है ।
• लक्ष्य से आसानी से विचलित होना
• सामान्य ध्वनियों एवं दृश्यों के प्रति आकर्षण
• ध्यान कम केन्द्रित करना या ध्यान का भटकाव
• इनमे सांवेगिक अस्थिरता होती है ।
• यह बालक अक्सर अव्यवस्थित रहते है ।
• बिना सोचे – विचारे कार्य करना
• उपयुक्त आचरण नहीं करना
• निर्णयात्मक क्षमता का अभाव
• स्वयं के प्रति लापरवाही
• भावात्मक अस्थिरता
• एक ही स्थिति में शांत एवं स्थिर रहने की असमर्थता
• स्वप्रगति के प्रति लापरवाही बरतना
• सामान्य से ज्यादा सक्रियता
• क्षीण स्मरण शक्ति का होना
• बिना वाह्य हस्तक्षेप के अन्य गतिविधियों में भाग लेना में असमर्थ होना तथा
• प्रत्यक्षीकरण संबंधी दोष।
• इनमें अक्सर तीव्र आवेश पाया जाता है
• चिंतन व स्मृति में और व्यवस्थित होते हैं
• इनमें हीनता की भावना पाई जाती है।
• गामक क्रियाओं में बाधा
• कार्य करने की मंद गति
• सामान्य कार्य को संपादित करने के लिए एक से अधिक बार प्रयास करना
• पाठ्य सहगामी क्रियाओं में शामिल नहीं होना
• यह बालक पढ़ने , लिखने व गणितीय क्रिया में पिछड़े होते हैं।
• तंत्रिका तंत्र संबधित दोष पाया जाता है
• इन बालकों में बोलने व सुनने में दोष होता हैं।

अधिगम अक्षम बालक :-

• सामान्य और सामान्य से थोड़ा ज्यादा सोचने एवं तर्क करने की योग्यता
• औसत विद्यालय उपलब्धि से निम्न का प्रदर्शन
• उपलब्धि और योग्यता केबीच में सार्थक अंतर का प्रदर्शन
• निष्पादन संबंधी कठिनाई से युक्त

अधिगम अक्षमता निम्नलिखित है :-

अफेज्या :- भाषा एवं संप्रेषण अधिगम अक्षमता को अफेज्या कहा जा सकता है। इससे पीड़ित छात्र मौखिक रूप से सीखने एवं अपने विचारों को अभिव्यक्ति प्रदान करने में कठिनाई अनुभव करता है। सामान्यता मस्तिष्क में किसी प्रकार की क्षति से यह विकार उत्पन्न होता है । मस्तिष्क में किसी प्रकार की क्षति के कारण बातचीत करने में आंशिक या पूर्ण अक्षमता को Dysphasiya कहा जाता है।

अलेक्सिया:- अलेक्सिया मस्तिष्क में किसी प्रकार की क्षति के कारण पढ़ने में अक्षमता को अलेक्सिया कहा जाता है । इसे शब्द अंधता या पाठ्य अंधता या विजुअल अफेयर भी कहा जाता है। यह एक्वायर्ड डिस्लेक्सिया होती है। (Learning Disabilty)
डिस्लेक्सिया :- डिस्लेक्सिया एक व्यापक शब्द है जिसका संबंध पठन विकार यानी रीडिंग डिसऑर्डर से होता है इस अधिगम अक्षमता में बालक को पढ़ने में कठिनाई होती है क्योंकि वह कई बार शब्दों के कुछ अक्षरों को उल्टा पढ़ता है जैसे saw को was पढ़ता है।

डिसग्राफिया :- डिसग्राफिया की लिखने संबंधी क्षमता को कहा जाता है इसमें या तो बच्चा ठीक से लिख नहीं पाता अथवा उसकी लिखावट ठीक नहीं हो पाती है। सामान्यता इसका कारण हाथ यह तेरी उंगलियों से संबंधित समस्या होती है इसके अतिरिक्त मस्तिक से संबंधित कुछ समस्याओं के कारण भी यह अधिगम अक्षमता संभव हो सकती है।

Dyscalculia :- यह एक प्रकार की गणित अधिगम अक्षमता होती है । इस अधिगम अक्षमता में बच्चे गणित को समझने में कठिनाई का अनुभव करते हैं । इसे Numlexia भी कहा जाता है। (अधिगम विकार)

डिस्थीमिया :- यह गंभीर तनाव की अवस्था को कहा जाता है । इस मनोविकार का प्रतिकूल प्रभाव बालक के अधिगम पर पड़ता है। डिस्थीमिया की अवस्था में व्यक्ति की मन स्थिति यानी चित्तवृत्ति हमेशा निम्न रहती है। (अधिगम विकार)

Dysmorphia :-;यह एक मेंटल डिसऑर्डर होता है जिसमें व्यक्ति को भ्रम हो जाता है कि उसके शरीर के कुछ अंग बहुत छोटे हैं या अपूर्ण है। वह अपने शरीर को विभिन्न अंगों की तुलना दूसरे लोगों से करने लगता है । इसका प्रतिकूल प्रभाव उसके अधिगम पर पड़ता है।

डिस्प्रेक्सिया :- शारीरिक कौशल संबंधी विकार शारीरिक क्रिया से संबंधित सभी क्षमता इसके अंतर्गत आती है।
(A) Fine motor skills :- इसके अंतर्गत शालिक मसल्स का प्रयोग बहुत ही कम होता है जैसे लिखना, सुई में धागा डालना इत्यादि।
(B) Gross motor skills :- इसके अंतर्गत शारिरिक मसल्स का प्रयोग अधिक होता है । जैसे खेलना , कूदना उठना , बैठना , चलना , लिखना इत्यादि।

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