मैती आंदोलन (Maiti Movement)

मैती आंदोलन (Maiti Movement)

मैती आंदोलन एक भावनात्मक पर्यावरणीय आन्दोलन था इस आंदोलन की शुरुआत 1994 में राजकीय इण्टर कालेज, ग्वालदम, जिला-चमोली के जीव विज्ञान के प्रवक्ता श्री कल्याण सिंह रावत जी द्वारा की गई।
सन 1994 में कल्याण सिंह रावत ने उत्तराखंड के पहाड़ों को पुनः हरा-भरा करने के लिए मैती आंदोलन चलाया था । यह आंदोलन उत्तराखंड की महिलाओं द्वारा चलाए गए चिपको आंदोलन से प्रेरित था l

मैती आंदोलन
मैती आंदोलन

उत्तराखंड के क्षेत्रीय भाषा में मैती का अर्थ मायका यानी मां का घर होता है। maiti movement में कुंवारी कन्या इन पौधों की बेरन (sappling) तैयार करती हैं । तथा विवाह के समय किसी निर्धारित वन क्षेत्र में स्मृति के रूप में इसका रोपण कर देती है । इसके पश्चात कन्या के माता-पिता उस पौधे का देखभाल अपनी पुत्री के जैसे करते हैं।

मैती आंदोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत ने उत्तराखंड के ग्वालदम के एक छोटे से गांव में वहां की कुंवारी कन्याओं को संगठित करके इस आंदोलन का शुभ आरंभ 1994 में किया था।

यह आंदोलन देश के शासक विदेशों में भी काफी प्रसिद्ध हुआ था। जो अभी भी निरन्तर चल रहा है, आज इस कार्यक्रम ने अपना फैलाव पूरे उत्तराखण्ड सहित देश के कई अन्य राज्यों तक कर लिया है।

Maiti Movement से जुड़ी महिलाओं ने आपस में मैती संगठन की स्थापना की है। इस संगठन का अपना वित्त कोष होता है । जिसे वृक्षारोपण पर खर्च किया जाता है। इस संगठन की अध्यक्षा को बड़ी दीदी के नाम से संबोधित किया जाता है।