माइंड मैपिंग (Mind Mapping)

माइंड मैपिंग क्या है? What is Mind Mapping? मस्तिष्क चित्रण, Mind Map, माइंड मैप

विशेषज्ञों के अनुसार मनुष्य की शॉर्ट टर्म मेमरी सिर्फ 7 बिट्स जानकारी याद रख सकती है यानी तीस दिनों की कुल पढ़ाई का सिर्फ 20 फीसदी ही हमें याद रह सकता है। अगर हम पढ़े हुए का रिवीजन ना करे तो हमारी पूरी पढ़ाई बर्बाद हो सकती है। कई रिसर्च के मुताबिक विज्युअली रिवाइज करने से हमारी स्मरण शक्ति बढ़ती है, पर विज्युअली रिवाइज करने का तरीका क्या हो? विज्युअली रिवाइज करने का तरीका है माइंड मैपिंग। माइंड मैपिंग नई तकनीक है, जो विषय को समझने और याद रखने में मदद करेगी।

माइंड मैप एक डायग्राम है, जिसका उपयोग विषय के टॉपिक को समझने के लिए किया जाता है। माइंड मैप्स हायरारिकल या ट्री ब्रांच फॉरमेट में बनाए जाते हैं, जिसमें आइडियाज की ब्रांचेज निकलती हुई लगती हैं। यह अलग-अलग टॉपिक्स के बीच कनेक्शन्स बनाने की कला का मिश्रण है। इसमें ज्ञान का सही उपयोग होता है, जिसके लिए दिमाग का सही इस्तेमाल होता है।
इसका स्ट्रक्चर बनाने के लिए विशेष स्किल्स की जरूरत होती है। यह विषय याद रखने के लिए छात्र को सबसे पहले विषय को समझने के लिए प्रेरित करता है। माइंड मैप्स बनाने के लिए व्यक्ति का रचनात्मक होना जरूरी है।

जब किसी विषय वस्तु की अवधारणा पर अच्छी तरह से समझ विकसित हो जाए एवं उसमें समाहित समस्त बिंदुओं को मस्तिष्क में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाए तो अर्जित किया हुआ ज्ञान सदैव काम आता है। ऐसे कौशल को विकसित करने में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हम अच्छी तरह समझ ले कि अध्ययन किए जा रहे प्रकरण की प्रकृति एवं उस में उल्लेखित बातों का वर्गीकरण किस तरह का है।

जैसे प्रकरण क्या है? उसके मुख्य तथ्य क्या है? तथ्यों में अंतर संबंध किस प्रकार के हैं? आदि जब तथ्यों का वर्गीकरण हो जाता है तो प्रकरण पर एक समग्र समझ बन जाती है। इस बीच हमें सूचनाओं का विश्लेषण करने का अभ्यास भी हो जाता है। इस बात की भी समझ विकसित हो जाती है कि हम पूरी सूचनाओं को किस प्रारूप में रखें ताकि समय आने पर उसे पूरी तरह से विस्तारित कर सके। ऐसी परिस्थिति में माइंड मैप का उपयोग अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।

माइंड मैप किसी प्रकरण को लंबे समय तक याद रखने में सहायक होता है। किसी भी विषय के विभिन्न विषय वस्तु पर उनकी प्रकृति एवं व्याख्या के आधार पर प्रमुख विचारों , तथ्यों , बिंदुओं को चिन्हित किया जाए एवं उससे जुड़े हुए समस्त सहायक विचारों तथ्यों बिंदुओं को रेखा चित्र के माध्यम से कम से कम शब्दों या चित्र व प्रतीकों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए तो उसे माइंड मैप कहा जाता है।

माइंड मैप बनाने के पूर्व उनकी संरचना को समझना अति आवश्यक है, जो कि निम्नलिखित नियम के पालन से ही की जाती है।

  • प्रकरण की प्रकृति एवं व्याख्या पर आधारित मुख्य विचार या केंद्रीय भाव का चिन्हित करना।
  • मुख्य विचार से सीधे जुड़े सहायक विचार सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।
  • सहायक विचारों के समस्त विवरणों को संक्षिप्त में नोट कर लेना चाहिए।
  • उपरोक्त प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद माइंड मैप का निर्माण इस तरह से करना चाहिए
  • मुख्य विचार एकदम मध्य में रखे
  • सीधे जुड़े सहायक विचार मुख्य विचार से जोड़ते हुए रेखांकित करें
  • सहायक विचारों के समस्त विवरण इनको सहायक विचार से आगे बढ़ाते हुए छोटे-छोटे विवरण के रूप में रेखांकित करना चाहिए

माइंड मैप की संरचना

माइंड मैप संरचना का रेखांकन करते समय उपरोक्त अनुसार क्रम का विशेष ध्यान रखना चाहिए। वरना गलत तरीके से बनाया हुआ माइंड मैप दिमाग को भ्रमित करने वाला हो सकता है।

माइंड मैप बनाने के नियम

  • किसी भी पेज के बीच से शुरू करें, मेन टॉपिक लिखें।
  • उस टॉपिक से संबंधित सब-टॉपिक्स के प्वॉइंट्स लिखें।
  • इसी तरह से आगे के सब-टॉपिक्स के प्वॉइंट्स लिखें।
  • कलर्स, ड्रॉइंग्स और सिम्बल्स, ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें
  • शीर्षक छोटे रखें।
  • टैक्स्ट साइज अलग कलर, अलग साइज और अलग फॉन्ट में हो।

माइंड मैप के प्रकरणों का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रकार का हो सकता है :-

  • प्रमुख बिंदु एवं उसकी व्याख्या
  • घटनाओं का क्रम
  • मुख्य विचार एवं उसके सहायक विचार
  • कारण और प्रभाव आधारित प्रकरण
  • वर्गीकरण आधारित प्रकरण
  • तुलना एवं संबंधित
  • अवधारणा आधारित व्याख्या इत्यादि

उपरोक्त वर्गीकरण के लिए अलग-अलग प्रकार के माइंड मैप का चुनाव प्रकरण को देखते हुए किया जाना चाहिए

किसी भी विषय के प्रकरण में माइंड मैप बनावाने के पूर्व शिक्षक को सर्वप्रथम प्रकरण की व्याख्या को ध्यानपूर्वक समझना होगा। समझने के उपरांत उसे एकदम सही सटीक माइंड मैप का चयन करना होगा। उस पर नियम अनुसार संपूर्ण बिंदुओं का रेखांकन इस प्रकार से करें ताकि माइंड मैप को देखकर प्रकरण की संपूर्ण जानकारी उसके सही संदर्भ के साथ समझी जा सके । आवश्यकता पड़ने पर उसे देखकर पूरे प्रकरण को विस्तारित किया जा सके।

निष्कर्ष

माइंड मैप बनाना एक आनंददायक प्रक्रिया है ,परंतु इसमें ध्यान देने योग्य बात यह है कि माइंड मैप बनाने के पूर्व प्रकरण को अच्छी तरह से समझ लिया जाए । ताकि उसमें मुख्य बिंदु से जुड़े सहायक बिंदु क्या है? सहायक बिंदुओं का विवरण क्या है? प्रकरणों की अलग-अलग प्रकृति के लिए अलग-अलग प्रकार के माइंड मैप बनाए जाते हैं। अतः इसका भी ध्यान रखना अति आवश्यक है।

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