विकलांग बच्चों की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2006

विकलांग बच्चों की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2006 (National Education Policy For Person with Disability -2006)

यह नीति 10 फरवरी 2006 से लागू की गई है। इसको सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment ) बनाता है। वह स्कूलों में लागू करता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय एक सहायक एजेंसी की भूमिका अदा करते हैं। अर्थात नीति बनवाने तथा लागू कराने में मदद करती है। इस नीति के अंतर्गत उच्च शिक्षा में अपंग बच्चों को शिक्षा में 3% आरक्षण दिया गया है। तथा 3 वर्ष से 6 वर्ष के बीच में विकलांग बच्चों की देखभाल व शिक्षा (ECCE) का प्रबंध किए जाने का प्रावधान किया गया है ताकि 6 वर्ष की आयु के बाद यह विकलांग बच्चे प्रथम कक्षा के लिए तैयार किए जा सके। यह योजना 6 से 18 वर्ष के विकलांगों के लिए है। 3 दिसंबर को विश्व विकलांग दिवस मनाया जाता है।
पाठ्यक्रम का संतुलन (Concept of Curriculum Adaptation)
अध्यापक के पास पाठ्यक्रम तो एक ऐसा होता है परंतु छात्र अलग-अलग योग्यता के होते हैं अत: हर बच्चों को उसकी योग्यता के अनुसार पाठ्यक्रम सिखाया या पढ़ाया जाना चाहिए
समावेशी शिक्षा में प्रयोग होने वाली अवधारणाएं
• संस्थान रहित शिक्षा (Different Concept in Inclusive Education) :- विकलांग बच्चों को विशिष्ट विद्यालय में नहीं भेजें
• सामान्यीकरण (Normalization) :- विकलांग बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाना
• न्यूनतम प्रतिबंधित पर्यावरण (Least Restrictive Environment) :- सामान्य विद्यालय में पढ़ते समय विकलांग बच्चों के मार्ग में आने वाली बाधाओं को न्यूनतम कर देना
• मुख्यधारा (Main Stream) :- सभी विकलांग बच्चे अपने आप को सामान्य बच्चों के जैसा ही समझे
बुद्धि लब्धि के आधार पर मानसिक विकलांग बालकों के प्रकार
• नर्सिंग केयर (Nursing Care) :- इनकी बुद्धि लब्धि 0 से 25 होती है यह कुछ भी सीख पाने में असमर्थ होते हैं इनको हमेशा दूसरों के सहयोग की आवश्यकता होती है
• प्रशिक्षणीय (Trainable) :- इन बालकों की बुद्धि लब्धि 25 से 50 होती है इनको बहुत कम प्रशिक्षित किया जा सकता है कभी-कभी इनकी देखभाल हेतु दूसरे व्यक्तियों की भी आवश्यकता पड़ती है
• शिक्षणीय (Educable):- इन बालकों की बुद्धि लब्धि 50 से 75 के बीच होती है इनको कुछ सीमा तक सिखाया पढ़ाया जा सकता है
• नियमित रूप से शिक्षण योग्य (Regular Educable) :- इन बालकों की बुद्धि लब्धि 75 से 90 के बीच होती है इसको सामान्य बच्चों की कक्षा में कुछ सीमा तक पढ़ाया जा सकता है
मनोवैज्ञानिकों को की राय है कि जिन बच्चों की बुद्धि लब्धि 0 से 60 तक होती है। वह बच्चे सामान्य बच्चों वाली कक्षाओं में नहीं पढ़ाई जा सकते। अतः उन्हें अलग कक्षाओं में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

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