बालक का शारीरिक विकास (Physical Development of Child)

बालक का शारीरिक विकास (Physical Development of Child)

बालक के विकास का एक महत्वपूर्ण पक्ष उसका शारीरिक विकास होता हैl बालक का शारीरिक विकास उसके समस्त व्यवहार तथा विकास के अन्य सभी पक्षों को प्रभावित करता हैl

शारीरिक विकास के अंतर्गत शारीरिक रचना. स्नायु मंडल. मांसपेशी वृद्धि, अंत स्रावी ग्रंथियां आदि प्रमुख रूप से आती हैl बालक के Physical Development का उसके मानसिक तथा सामाजिक विकास पर स्पष्ट प्रभाव पड़ता हैl यही कारण है कि शैक्षिक दृष्टि से शारीरिक विकास को अत्यधिक महत्वपूर्ण स्वीकार किया जाता हैl

विकास की विभिन्न अवस्थाओं में physical development की प्रक्रिया भिन्न-भिन्न होती है l मानव का विकास निश्चित अवस्थाओं में होता है विकास की प्रत्येक अवस्था की विशेषता होती है।

मनोवैज्ञानिकों ने अपनी सुविधा अनुसार विकास को विभिन्न अवस्थाओं में बांट कर उन में होने वाले परिवर्तनों और विशेषताओं को पहचान कर यह स्पष्ट कर दिया है कि बालक का विकास एक अवस्था से दूसरी अवस्था में अचानक नहीं होता बल्कि विकास की यह गति स्वभाविक रूप से क्रमशः होती रहती हैl मनुष्य के विकास क्रम को निम्नलिखित अवस्थाओं में विभक्त किया गया है

बालकों में शारीरिक विकास
बालकों में शारीरिक विकास
  • भ्रूण अवस्था ( जन्म से पूर्व)
  • शैशव अवस्था ( जन्म से लगभग 5 या 6 वर्ष तक)
  • बाल्यावस्था ( 7 से 12 वर्ष तक)
  • किशोरावस्था ( 12 से 18 वर्ष तक)
  • युवा अवस्था (18 वर्ष से लेकर 35 वर्ष तक)
  • प्रौढ़ावस्था (35 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक)

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