हाथी संरक्षण परियोजना तथा हाथी विकास कार्यक्रम

Elephant Project (हाथी परियोजना) हाथी संरक्षण परियोजना (Elephant Conservation Project) तथा हाथी विकास कार्यक्रम । Important Topics for UPTET, UPPSC, UPSC

हाथियों की संख्या में भारी गिरावट आ जाने के कारण तथा हाथियों के प्राकृतिक आवास – स्थलों में उनका दीर्घकालीन जीवन सुनिश्चित करने के लिए , पर्याप्त संख्या में हाथियों की आबादी रखने वाले राज्यों में 1992 ई . में गजतमे नामक हाथी संरक्षण परियोजना चलायी गयी ।

केंद्र सरकार ने हाथी परियोजना का प्रारम्भ झारखंड के सिंह भूमि जिले से किया था । हाथी परियोजना का उद्देश्य हाथियों की संख्या को बढ़ाना तथा उसके प्राकृतिक आवास में उसे प्रतिस्थापित करना था।

वर्तमान में हाथी परियोजना मुख्य रूप से 16 राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेशों में क्रियान्वयन की जा रही है । केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 12 अगस्त 2017 को पहले समन्वय आधारित अखिल भारतीय हाथी संख्या आकलन के प्रारंभिक परिणाम को जारी किया गया था।

इस रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल हाथियों की संख्या 27312 है जिसमें सर्वाधिक हाथियों की संख्या वाला राज्य कर्नाटका (6049) दूसरा असम (5719) तीसरा केरल (3054) है।

अगस्त 2017 में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हाथियों की कुल संख्या 27,312 दर्ज की गई। इसमें हाथियों की सर्वाधिक संख्या कर्नाटक में दर्ज की गई है, जहां इनकी संख्‍या 6049 थी। इसके बाद असम 5719 हाथियों के बाद दूसरे और केरल जहां 3054 हाथी मिले तीसरे स्‍थान पर रहा।

हाथी परियोजना

देश में वर्तमान में कुल एलीफेंट रिजर्व क्षेत्र की संख्या 32 है। राजस्थान के जयपुर के आमेर ( कुंडा गाँव ) में केन्द्र व राज्य सरकार की सहायता से एशिया का तीसरा एलीफट विलेज बनाया जा रहा है , जिसमें हाथियों के लिए चिकित्सा केन्द्र महावतों के लिए रहने के लिए घर तथा राइडिंग ट्रैक आदि बनाये जायेंगे । इस प्रकार के दो अन्य विलेज एशिया में श्रीलंका एवं थाइलैंड में हैं ।

देश में पहला हाथी पुनर्वास केंद्र हरियाणा में बनाया जा रहा है हाथियों को संरक्षित करने के उद्देश्य से अक्टूबर 2010 में केंद्र सरकार ने हाथी को राष्ट्रीय विरासत पशु (नेशनल हेरिटेज एनिमल) घोषित किया था।

हाथी संरक्षण परियोजना तथा हाथी विकास कार्यक्रम
हाथी संरक्षण परियोजना तथा हाथी विकास कार्यक्रम

हाथी संरक्षण परियोजना से सम्बन्धित महत्वपूर्ण बिन्दु:-

हाथी के संरक्षण तथा उसके बेहतर प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद् महेश रंगराजन की अध्यक्षता में एक कार्यबल यानी टास्क फोर्स का गठन किया था।

• पशुओं के अधिकारों के लिए काम करने वाली एक संस्था पेटा (people for the ethical treatment of animal) तथा बन्नेरुधा राष्ट्रीय उद्यान के सहयोग से 29.5 हेक्टेयर के क्षेत्र में बेंगलुरु के पास देश का प्रथम हाथी अभ्यारण बनाया गया है।

• देश में हाथियों हाथियों के संरक्षण हेतु विश्व हाथी दिवस के अवसर पर 12 अगस्त 2017 को केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा एक गज यात्रा अभियान का प्रारंभ किया गया था इस अभियान को देश में हाथियों की बहुलता वाले क्षेत्र के कुल 12 राज्यों में संचालित किया गया।
आईयूसीएन के रेड लिस्ट में अफ्रीकी हाथियों को वल्नरेबल तथा एशियाई हाथी को एंडेंजर्ड सूची में रखा गया है।

भारत सरकार ने भारतीय हाथी को राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित किया है। भारतीय हाथी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में सूचीबद्ध करके उच्चतम कानूनी सुरक्षा भी प्रदान की गई है।

सीएमएस समझौते की अनुसूची-I में भारतीय हाथी को शामिल करने से भारत की सीमाओं से बाहर भारतीय हाथी के प्रवास की प्राकृतिक जरूरत पूरी होने के साथ-साथ सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित होगी।

इस प्रकार हमारी भावी पीढ़ियों के लिए इस लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार की छोटी उप-आबादी के साथ अन्तर्मिश्रण से इन हाथियों के आबादी को व्यापक ‘जीन’ आधार उपलब्ध होगा। इससे इनके प्रवासी मार्गों के कई हिस्सों में मानव हाथी संघर्ष को कम करने में भी मदद मिलेगी।

1 thought on “हाथी संरक्षण परियोजना तथा हाथी विकास कार्यक्रम”

  1. Pingback: गिद्ध संरक्षण प्रोजेक्ट , 2004 - CTETPoint

Comments are closed.