वंगाला या वान्गाला पर्व ( (Wangala Festival)

वंगाला पर्व Wangala Festival , वान्गाला पर्व, सौ ड्रमों का पर्व

Wangala Festival , Wangla Festival, वांगाला पर्व, वांगाला फेस्टिवल
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वंगाला (Wangala) या वान्गाला पर्व मेघालय, असम, त्रिपुरा और बांग्लादेश में रहने रहने वाली गारो जनजाति द्वारा मनाया जाता है। इस त्यौहार के दौरान स्थानीय लोग राज्य के लगभग हर गाँव में देवता पतिगप्पा रारंगीपा के सम्मान में समारोह आयोजित करते हैं।

भारत के पूर्वोत्तर में स्थित मेघालय राज्य और उत्तरी बांग्लादेश के कुछ क्षेत्रों में बसने वाले गारो समुदाय द्वारा नवम्बर के महीने में फ़सल-कटाई से सम्बन्धित एक उत्सव है। गारो भाषा में ‘वंगाला’ का अर्थ ‘सौ ढोल’ है और इस त्योहार में पारम्परिक गारो आस्थाओं के ‘सलजोंग’ नामक सूर्य-देवता का सम्मान किया जाता है जो फ़सल के अधिदेवता भी माने जाते हैं।

इस पर्व को सौ ड्रमों का पर्व भी कहते है क्योंकि इस समय लोग ‘दकमंडा दसारी’ नामक सुंदर रंग बिरंगे परिधान पहनते हैं और ड्रमों की ताल के साथ नृत्य करते हुए स्थानीय गीत गाते हैं। कई दिनों तक चलने वाले इस पर्व में सूर्य देवता जिन्हें मिसी सलजोंग कहा जाता है, को अच्छी फसल के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया जाता है तथा गांव का मुखिया जिसे लोक्मा कहा जाता है, वह इन्हें बियर, पके चावल एवं सब्जियां अर्पित करते हैं।

राज्य के लोग चार दिनों और रात्रि में अनर्गल प्रलाप के साथ लगातार धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करते हैं। त्योहार के समापन को योद्धा के नृत्य द्वारा चिह्नित किया जाता है, जो वास्तव में एक शानदार और मंत्रमुग्ध करने वाला तमाशा है।

इस पर्व में लड़कियां विभिन्न प्रकार के नृत्य करती है ड्रम और बांस की बांसुरिया से फोल्क ध्वनियाँ बजाई जाती है। यह पर्व 3 दिन या कभी-कभी एक हफ्ते का हो सकता है। नृत्य परफॉर्मेंस कटाई के सीजन के समाप्ति और सर्दी के प्रारंभ होने का संकेत है। इस नृत्य पर्व मे परफॉर्मर्स त्रिपुरा असम कभी-कभी बांग्लादेश से भी बुलाए जाते हैं। इन सभी बुलाए गए टीमों के बीच में प्रतियोगिता होती है और जीतने वाले को इनाम भी दिया जाता है।

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