कार्यशाला प्रविधि (Workshop Technique)

कार्यशाला प्रविधि (Workshop Technique) क्या होती है?

कार्यशाला क्या है ? कार्यशाला एक निश्चित विषय पर परिचर्चा का प्रायोगिक कार्य होता है। जिसमें सभी प्रतिभागी सदस्य अपने ज्ञान अनुभवों व कौशलों के पारस्परिक आदान-प्रदान के द्वारा विषय के बारे में सीखते हैं। शिक्षक अपने शिक्षण में सफलता पाने के लिए विभिन्न विधियों / प्रविधियों का प्रयोग करता है।

कार्यशाला प्रविधि ऐसी ही एक प्रविधि है इसकी सहायता से छात्रों में क्रियात्मक पक्षीय उच्च अधिगम को सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किया जाता है।
कार्यशाला शब्द का प्रयोग अभियांत्रिकी कि क्षेत्र में अधिक किया जाता है। जैसे रेल वर्कशॉप, सड़क परिवहन कार्यशाला आदि। जहां पर रेल इंजन व बसों को निर्मित करने व उनकी मरम्मत की व्यवस्था होती है। कार्य करते हुए ही यहां पर कुछ सीखा जाता है। अतः इस प्रविधि में श्रम आधारित स्वयं सक्रिय रहते हुए व्यवहारिक क्रियाकलापों के अधिगम को महत्व दिया जाता है।

कार्यशाला प्रविधि का अर्थ (Meaning of Workshop):-

कार्यशाला प्रविधि में छात्र वास्तविक रूप से सक्रिय रहकर कार्य करते हुए अपने व समूह के सदस्यों के अनुभव के पारस्परिक आदान-प्रदान के द्वारा किसी विषय की जानकारी प्राप्त करता है क्योंकि छात्र इसमें सक्रिय प्रतिभागी करता है। अतः प्राप्त ज्ञान स्थाई, विश्वसनीय व उपयोगी होता है। इस प्रविधि का प्रयोग छात्रों के क्रियात्मक पक्ष के विकास के लिए किया जाता है। इसमें प्रायोगिक कार्य द्वारा ज्ञान अर्जन को अधिक महत्व दिया जाता है।

कार्यशाला की परिभाषा (Meaning of Workshop) :

डॉक्टर प्रीतम सिंह के अनुसार :- ” कार्यशाला आमने-सामने का एक ऐसा प्राथमिक समूह है जिसमें सामाजिक अंतः क्रिया अधिक नजदीक तथा प्रत्यक्ष होती है और यह सदस्यों पर अधिक सामाजिक नियंत्रण रखती है”।

शिक्षा शब्दकोश के अनुसार ” कार्यशाला एक शैक्षणिक प्रविधि है जिसमें समान रुचि हो और समस्याओं से युक्त व्यक्ति उपयुक्त विशेषज्ञों के साथ प्रायः आवासिक और कई दिवसों की अवधि मे आवशयक सूचनाएं प्राप्त करने और समूह अध्ययन निकालने के लिए मिलते हैं “।

उपरोक्त आधार पर निष्कर्ष रूप मे कहा जा सकता है कि कार्यशाला /कार्यगोष्ठी परम्परागत क्रियाकलापों से परे सर्वथा नवीन, रोचक व आनंददायी माहौल प्रस्तुत करती है ऐसे माहौल मे छात्र- अंतर्निहित क्षमता हुआ मानसिक चिंतन अपने वास्तविक रूप में हमारे सामने प्रस्तुत होता है।

कार्यशाला प्रविधि के उद्देश्य
(Aim of Workshop Technique) :-

• ज्ञानात्मक उद्देश्य
• क्रियात्मक उद्देश्य


ज्ञानात्मक उद्देश्य :-

• शिक्षण उद्देश्य एवं विधियों का निर्धारण करना तथा उनकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना
• किसी प्रकरण के व्यवहारिक पक्ष को समझना
• शिक्षण संबंधित समस्याओं का समाधान खोजना

क्रियात्मक उद्देश्य :-

• शिक्षण की विशिष्ट क्षमता का विकास करना
• समूह में कार्य करने व सहयोग की भावना का विकास करना
• शिक्षण की प्रभावी विधियों पर विधियों का निर्धारण करना
• शिक्षा व शिक्षण के नवीन उपागमों का प्रशिक्षण देना
• शिक्षण कौशल का विकास को सुधार करना


कार्यशाला का क्षेत्र Field of Workshop Technique) :-

• नवीन प्रकार की परीक्षाओं के प्रश्नों व प्रश्न पत्रों के निर्माण हेतु
• विविध प्रकार की प्रश्नावली के निर्माण हेतु
• पाठ योजना में प्राप्त उद्देश्य को व्यवहारगत परिवर्तनों के रूप में लिखने हेतु
• क्रियात्मक शोध के प्रयोग हेतु

पाठ योजना के नवीन प्रारूप बनाने हेतु कार्यशाला में शिक्षण का क्रम (Sequence of Technique in Workshop) :-

• कार्यशाला में शिक्षण का क्रम में निम्न प्रकार का होता है
• वास्तविक अनुभव का आदान प्रदान करना
• सहभागियों के साथ कार्य करना
• कार्यों / तैयार सामग्री की जांच परीक्षण व निरीक्षण करना
• निष्कर्ष (पाठ से संबंधित तथ्यों का ज्ञान)
• प्रकरण / समस्या का चयन/ प्रस्तुतीकरण व स्पष्टीकरण करना
• पाठ पर आधारित समूह कार्य

शिक्षण में कार्यशाला का महत्व (Importance of workshop in teaching) :-

शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य व्यक्तित्व का सर्वांगीण व संतुलित विकास करना आत: शिक्षक का प्रमुख दायित्व यह है कि विद्यालय में ऐसा वातावरण तैयार करें जिसमें प्रत्येक बच्चे स्वयं सीखने में रुचि ले व तत्पर रहें । सीखने का एक ऐसा वातावरण बनाने में कार्यशाला प्रविधि अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। इसमें वास्तविक परिस्थितियों में छात्र समस्या समाधान का प्रयास करते हैं और स्वयं करते हुए सीखते हैं। सीखने के लिए वह अध्यापक पर निर्भर नहीं रहते और समूह के सदस्यों के साथ मिलजुल कर कार्य करते हुए नवीन अनुभव प्राप्त करते हैं।

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